भोपाल 4 जून (आरएनएस)। ऐतिहासिक बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा इसका नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालयÓ करने का प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल मंगू भाई पटेल को भेजे जाने के बाद से ही इस पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है।
एक तरफ जहां विपक्ष इसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के अपमान से जोड़ रहा है, वहीं सरकार इस दिशा में कदम आगे बढ़ाती दिख रही है। इसी कड़ी में आज गुरुवार को प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राज्यपाल से मुलाकात भी की है।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा बरकतउल्लाह विश्वाविद्यालय नाम बदलना ये एक बहुत अफसोस जनक निर्णय है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। एक महान क्रांतिकारी का नाम बदलना है तो होना यह चाहिए था कि नीट परीक्षा के बच्चों पर चर्चा होती है उनके भविष्य पर चर्चा होती। उनके साथ जो घटनायें हुई उसको लेकर सरकार और विश्वाविद्यालयों और शिक्षा मंत्री को विचार करना था। ये ना करके उसको उलझाने का काम किया है और उसमें जो पत्र लिखा वो और अफसोस जानक है जिसकी मैं निंदा करता हूं।
विधायक आरिफ मसूद ने कहा वाग्देवी के नाम पर आप नया विश्वाविद्यालय बना देते थे। उसमें क्या बुराई है सब स्वागत करेंगे। एक बनी-बनाई संस्था के 38 साल से चलते हुए नाम को आप हटाना चाहते हैं और यह कहना कि वो कौन थे? वो व्यक्ति था जो आजाद भारत का भारत का प्रधानमंत्री था। राजा महेंद्र सिंह राष्ट्रपति थे। उसने एक बड़ा आंदोलन देश के लिए किया और इस प्रदेश के लिए किया। ऐसे व्यक्ति के नाम को बदलना गलत है।
मैंने राज्यपाल महोदय से समय मांगा है जैसे ही समय मिलता है उनसे मुलाकत करेंगे क्योंकि इसके मुखिया राज्यपाल होते हैं। मैं मोहन यादव जी से भी कहना चाहता हूं कि आज कल आप बड़े सिध्दांत की बातें कर रहे हैं। सुना है बहुत सिद्धांत वादी मुख्यमंत्री बनने का प्रयास कर रहे हैं आप तो अगर वास्तव में सिद्धांतवादी हैं तो आप उसका परिचय दें कि एक महान क्रांतिकारी बरकतउल्लाह भोपाली का नाम इस तरह बदनाम ना किया जाए और ना बदला जाए।
विधायक आरिफ मसूद ने कहा मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि कांग्रेस को भी इसमें साथ होना चाहिए और एक महान क्रांतिकारी का नाम को आप कैसे बदल दोगे? 38 साल से चल रहे एक इंस्टीट्यूट का नाम आप बेवजह बदल रहे हो। कोई वजह नहीं है तो आपको इस तरह बदलने का अधिकार जनता ने सरकार बनाकर दे जरुर दिया लेकिन आप उसका ध्यान रखिए इस गरिमा का और संविधान का ध्यान रखें।
उच्च शिक्षा मंत्री के प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद फैसला लेने के बयान पर विधायक मसूद ने कहा राज्यपाल महोदय इसके मुखिया होते हैं मैं उनसे मिलने जा रहा हूं लेकिन यह तो तय करना पड़ेगा शिक्षा मंत्री जी को कि जो एग्जीक्यूटिव कमेटी ने बरकतउल्लाह भोपाली के नाम पर जो टिप्पणी की है वो निंदनीय है या नहीं है। एग्जीक्यूटिव काउंसिल बच्चों का भविष्य बनाने और विश्वाविद्यालय का नाम बढ़ाने की बात करेगी या घटाने की करेगी।
विधायक ने कहा बरकतुल्लाह भोपाली पहले व्यक्ति हैं जिसने विदेश में रहकर अंग्रेजों के खिलाफ झंडा बुलंद करके सरकार बना ली थी, राजा महेंद्र राष्ट्रपति बने और ये प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन, असल में ये जो एग्जीक्यूटिव काउंसिल है इनके जो पुरोधा हैं जिस संस्था से ये निकलकर आते हैं उनका आज़ादी में योगदान नहीं था इसलिए इनको क्रांतिकारियों की गरिमा का एहसास नहीं है जिन्होने देश के लिए खून बहाया है उनको एहसास होता है।
कांग्रेस की सरकार में पहले नाम बदले को लेकर आरिफ मसूद ने कहा ये बात सही है लेकिन उससे पहले सागर में जाता था भोपाल, वो 15-20 साल चला उसके बाद एक क्रांतिकारी के नाम पर रखा जाए जिसने इतना बड़ा योगदान दिया तो अब इसका नाम हटाने का उचित कारण बताएं। आप वाग्देवी के नाम पर कर रहे हैं हम तो विरोध नहीं कर रहे। हम कह रहे हैं कि एक नया विश्वविद्यालय बनाईए। आपने बहुत विश्वविद्यालय बनाए आपने भोज यूनिवर्सिटी बनाई तो किसी ने विरोध किया क्या?

