रायपुर, 04 जून (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला सड़क परियोजना मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी जयप्रकाश गांधी को गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट में पेशी के बाद आरोपी को ईडी रिमांड पर भेज दिया गया है। इस मामले में ईडी की ओर से की गई यह पहली बड़ी गिरफ्तारी मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, मामला रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र से जुड़ा है, जहां रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई थीं। आरोप है कि अधिकारियों, पटवारियों और जमीन कारोबारियों के एक नेटवर्क ने फर्जी दस्तावेज, बैकडेटेड रिकॉर्ड और कूटरचित प्रविष्टियों के जरिए करोड़ों रुपये का मुआवजा हासिल किया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ ऐसी जमीनों के लिए भी मुआवजा लिया गया, जो पहले से सरकारी रिकॉर्ड में जलाशय या सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थीं। आरोप है कि इन्हें निजी भूमि दर्शाकर मुआवजा राशि का भुगतान कराया गया।
पहले हो चुकी है कई ठिकानों पर छापेमारी
इस मामले में इससे पहले ईडी और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्लू ) की टीमों ने रायपुर, अभनपुर और कुरुद सहित कई स्थानों पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान जयप्रकाश गांधी और उनके सहयोगियों के ठिकानों से दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए थे।
बताया जा रहा है कि बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल डेटा और भूमि संबंधी दस्तावेजों की जांच के आधार पर ईडी ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की है।
रिमांड में हो सकते हैं बड़े खुलासे
जयप्रकाश गांधी से ईडी की पूछताछ के दौरान घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित रूप से प्राप्त मुआवजा राशि किन-किन खातों में स्थानांतरित की गई और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई संभव है। भारतमाला मुआवजा घोटाले को प्रदेश के सबसे चर्चित भूमि एवं मुआवजा घोटालों में से एक माना जा रहा है, जिस पर अब ईडी की जांच तेज हो गई है।
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