नईदिल्ली,05 जून। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) विदेशाी लीगों में खेलने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले खिलाडिय़ों के खिलाफ सख्ती बरतने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत वह सेवानिवृत्ति नीति बनाने की तैयारी कर रहा है। हाल ही में एपेक्स काउंसिल की बैठक में इस गंभीर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बोर्ड इस बात से चिंतित है कि भारतीय क्रिकेटर्स विदेशी लीगों के आकर्षक प्रस्तावों के कारण समय से पहले संन्यास ले रहे हैं।
बीसीसीआई के अनुसार, विजय शंकर विदेशी लीगों में खेलने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ताजा उदाहरण है। उन्होंने हाल ही में भारतीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की और लगभग तुरंत ही लंका प्रीमियर लीग में खेलने के लिए उपलब्ध हो गए। इसके कुछ समय बाद उन्हें 2026 सीजन के लिए कैंडी रॉयल्स से करार मिल गया। इससे पहले दिनेश कार्तिक, युवराज सिंह, उन्मुक्त चंद, प्रवीण तांबे और इरफान पठान भी ऐसा कर चुके हैं।
एपेक्स काउंसिल की बैठक में विदेशी लीगों के प्रति खिलाडिय़ों के बढ़ते झुकाव को रोकने के लिए 5 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लाने पर चर्चा हुआ है। हालांकि, इसका अंतिम फैसला बीसीसीआई सचिव पर छोड़ा गया है। कूलिंग-ऑफ पीरियड के बाद अगर कोई भारतीय खिलाड़ी संन्यास लेकर सीधे विदेशी लीगों में खेलने जाता है, तो उस पर भारतीय क्रिकेट सिस्टम में वापस लौटने पर कम से कम 5 साल का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
इस कड़े कदम का उद्देश्य खिलाडिय़ों को यह संदेश देना है कि वो संन्यास का फैसला बहुत सोच-समझकर लें। बोर्ड चाहता है कि देश की अहम प्रतिभाएं और अनुभवी खिलाड़ी ज्यादा समय तक भारतीय घरेलू ढांचे और इंडियन प्रीमियर लीग की प्रतिष्ठा को बनाए रखने में अपना योगदान दें। हालांकि, इस नीति पर आखिरी मुहर लगाने और इसके कानूनी पहलुओं को जांचने की जिम्मेदारी बीसीसीआई के अध्यक्ष और सचिव को ही सौंपी गई है।
बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक, कोई भी सक्रिय भारतीय क्रिकेटर चाहे वो अंतरराष्ट्रीय, घरेलू क्रिकेट या आईपीएल खेल रहा हो, उसे विदेशी लीग में खेलने की इजाजत नहीं है। खिलाड़ी सिर्फ तभी विदेशी लीगों का रुख कर सकते हैं जब वो भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूप और आईपीएल से पूरी तरह संन्यास ले लें। इसी नियम का फायदा उठाकर हाल के दिनों में कई खिलाडिय़ों ने संन्यास लेते ही विदेशी टीमों के साथ करार किया है।
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