कोलकाता,05 जून(आरएनएस)। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। पार्टी में चल रही बगावत के बीच आज उन्होंने अपने आवास पर विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक से ज्यादातर नेताओं ने दूरी बना ली है। कहा जा रहा है कि केवल 8 विधायक और 6 सांसद ही ममता की बैठक में पहुंचे। वहीं, पार्टी ने विपक्ष के नेता की नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विधायकों में बीना मंडल, आशिमा पात्रा, मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हकीम, अशोक कुमार देब, बिमान बनर्जी और शोभनदेब चट्टोपाध्याय ही शामिल हुए। वहीं, सांसदों में डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओब्रायन और सुदीप बंद्योपाध्याय ने शिरकत की। बता दें कि ञ्जरूष्ट के पास 80 विधायक हैं। इनमें से 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट बना लिया है।
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, हमने तय किया है कि स्पीकर की ओर से नियुक्त विपक्ष के नेता का पद गैर-कानूनी है। हम इसके खिलाफ सोमवार को कोर्ट जाएंगे। हम हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। भाजपा जिस तरह से टीएमसी कार्यकर्ताओं की हत्या कर रही है और उन पर झूठे मुकदमे दर्ज कर रही है, हम उसके खिलाफ लड़ेंगे। हम सड़कों पर भी लड़ेंगे और कोर्ट में भी।
इससे पहले ममता ने 31 मई को कालीघाट स्थित अपने आवास पर विधायकों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में पार्टी के 80 विधायकों में से केवल 20 ही पहुंचे और 60 गायब रहे। इसके बाद पार्टी ने कहा था कि विधायक टीएमसी नेताओं पर हुए हमले के विरोध प्रदर्शन की तैयारियों में लगे थे, इसलिए बैठक में शामिल नहीं हुए। हालांकि, इसके अगले ही दिन ऋतब्रत के नेतृत्व में टीएमसी में बगावत हो गई थी।
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