# लोकतंत्र की मजबूती में पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है : विष्णुदेव साय
नई दिल्ली , 06 जून (आरएनएस) । हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रायपुर में आयोजित “पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव” राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, फेक न्यूज़, डिजिटल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर गंभीर चिंतन का मंच बनकर सामने आया। रायपुर Press Club द्वारा आयोजित इस आयोजन में देश के वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया शिक्षाविदों, संपादकों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लेकर पत्रकारिता के भविष्य को लेकर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज और शासन के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करते हैं और वर्तमान समय में जिम्मेदार तथा तथ्यपरक पत्रकारिता की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों की सुरक्षा और उनके हितों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। इंडिया हेरिटेज सेंटर के निदेशक एवं वरिष्ठ पत्रकार के. जी. सुरेश ने हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की यात्रा को सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय जागरण की ऐतिहासिक धारा बताते हुए कहा कि तकनीक बदल सकती है, माध्यम बदल सकते हैं, लेकिन पत्रकारिता का मूल धर्म जनहित और सत्य की स्थापना ही रहेगा। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि सूचना क्रांति के इस दौर में मीडिया की जिम्मेदारी पहले की तुलना में अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि समाज को सही दिशा देने में पत्रकारिता की भूमिका निर्णायक है और मीडिया को विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। “पत्रकारिता : स्याही से स्क्रीन तक — चुनौतियां और संभावनाएं” विषय पर आयोजित सत्र में वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हर्षवर्धन त्रिपाठी, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति विजय मनोहर तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्रा तथा साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज ने अपने विचार रखे। रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया शिक्षाविदों और संपादकों ने पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप और उसके भविष्य को लेकर खुलकर चर्चा की। विमर्श का केंद्र यह रहा कि तकनीक और सोशल मीडिया के तेज विस्तार के बीच पत्रकारिता के मूल मूल्य — विश्वसनीयता, निष्पक्षता और जनहित — किस प्रकार सुरक्षित रखे जाएं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने माना कि आज सूचना का प्रवाह पहले से कहीं अधिक तेज हो चुका है, लेकिन इसी गति के बीच सत्य और असत्य की पहचान सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। फेक न्यूज़, अपुष्ट सूचनाओं और सोशल मीडिया आधारित तात्कालिक प्रतिक्रियाओं के दौर में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया शिक्षाविदों ने चर्चा के दौरान इस बात पर चिंता जताई कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सूचना को लोकतांत्रिक जरूर बनाया है, लेकिन इसके साथ ही पत्रकारिता और सामान्य कंटेंट क्रिएशन के बीच की रेखा लगातार धुंधली होती जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने और लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूत करने की प्रक्रिया है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के पत्रकारों ने यह भी रेखांकित किया कि देश के कई महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलावों को राष्ट्रीय विमर्श में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ हुए बदलावों और बेहतर होते सुरक्षा माहौल का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे विषयों पर गंभीर और संतुलित पत्रकारिता की आवश्यकता है। न्यूज़ रूम से न्यू मीडिया तक” विषय पर हुए सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आने वाले समय में पत्रकारिता पूरी तरह तकनीक आधारित जरूर हो सकती है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता का आधार आज भी तथ्य, संतुलन और नैतिकता ही रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने फेक न्यूज़, सोशल मीडिया ट्रायल, एआई आधारित कंटेंट, डिजिटल प्रतिस्पर्धा और मीडिया की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। यह भी कहा गया कि तकनीक पत्रकारिता का माध्यम बदल सकती है, लेकिन उसकी आत्मा आज भी सत्य, जनविश्वास और जवाबदेही पर ही आधारित है। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकारों को लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान भी प्रदान किया गया। साथ ही हिंदी पत्रकारिता की द्विशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में वर्षभर व्याख्यानमाला, संवाद, प्रशिक्षण कार्यक्रम और मीडिया से जुड़े विभिन्न आयोजनों की घोषणा की गई।
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