रतलाम,06 जून(आरएनएस)। श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव में श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उत्सव परम्परागत उत्साह के साथ मनाया गया । दयाल वाटिका परिसर “जन्मे कौशल्या के दुलारे ” और “नन्दजी के आँगन में बज रही बधाई..” के जयकारों से गूंज उठा । महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वतीजी महाराज ने कहा कि – जब अधर्म, अन्याय और अत्याचार अपनी सीमा पार कर जाते हैं, तब धर्म की स्थापना और सज्जनों की रक्षा के लिए ईश्वर किसी न किसी रूप में अवतरित होते हैं। श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन प्रेम, मित्रता, करुणा और जनकल्याण का आदर्श है। उनका जन्मोत्सव हमें इन मूल्यों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। यही श्रीमद्भागवत कथा का मूल संदेश है, जो समाज को सदाचार, प्रेम और धर्ममय जीवन की ओर प्रेरित करता है।
श्री हरिहर सेवा समिति मोहनलाल भट्ट परिवार एवं श्री कालिका माता सेवा मंडल ट्र्स्ट द्वारा पुरुषोत्तम मास के अवसर पर दयाल वाटिका सैलाना रोड पर चौथे दिन उल्लास और उमंग का माहौल रहा । कथा प्रसंग अनुसार जैसे ही भगवान के जन्म की मंगल घड़ी आयी भक्तजनों ने आतिशबाजी के बीच भजन और ढोल की थाप पर थिरकते हुए आनंद मनाया। महिलाएं- पुरुष केसरिया और पीले वस्त्र में समूह नृत्य कर रहे थे। आयोजक मोहनलाल भट्ट परिवार की ओर से नन्हे कन्हैया को टोकरी में लेकर नन्द बाबा व्यासपीठ पर पहुंचे। पूज्य स्वामीजी ने बाल स्वरूप भगवान के दर्शन कर सभी को जन्मोत्सव की मंगल बधाईयाँ दी। माखन मिश्री और उपहार वितरित किये गये।
स्वामीजी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि मानव समाज को मार्गदर्शन देने वाला महान संदेश है। जो हमे यह बताता है कि भय और अत्याचार के बावजूद अंतत: सत्य और धर्म की ही जीत होती है। भगवान का जन्म यद्यपि कारागार में हुआ, फिर भी उन्होंने संसार को आनंद और आशा का संदेश दिया। इससे यही सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियाँ सफलता और महानता की राह नहीं रोक सकतीं। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हमें यह विश्वास दिलाता है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, धर्म, सत्य और न्याय का प्रकाश अंतत: अवश्य प्रकट होता है। हमेशा अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है। वसुदेव और देवकी ने अनेक कष्ट सहकर भी अपने धर्म और कर्तव्य का पालन किया। समाज को भी अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए।
स्वामीजी ने कहा कि यदि कोई धोखे से भी प्रभु का नाम ले लेवे तो वह कल्याण करता है। ऐसे में अधिक मास के समय क्या गया भजन और नाम स्मरण अनंत गुना फलदायी होता है। जप, तप, व्रत, कथा श्रवण जैसे साधनों के माध्यम से अपना ह्रदय पवित्र करना चाहिए। इसी से परमात्मा को प्राप्त करने की पात्रता विकसित होती है। हमारा जैसा अभ्यास होता है वैसा ही अंत समय में उच्चारण और भाव होता है इसलिए हमेशा मधुर और हितकर वचन ही बोलना चाहिए। यदि आपको परमात्मा की कृपा प्राप्त हो जाती है तो देवता भी आपके सहयोग के लिए सदैव हाजिर रहते है।
इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, आरडीए अध्यक्ष मनोहर पोरवाल,निगम अध्यक्ष मनीषा शर्मा, आरडीए उपाध्यक्ष गोविन्द काकानी, संचालक मंडल सदस्य राखी व्यास, बजरंग पुरोहित ने स्वामीजी का स्वागत कर आरती में भाग लिया। उनका आयोजन समिति की ओर से अभिनन्दन किया गया। यंहा प्रभु प्रेमी संघ, श्री हरिहर सेवा समिति प्रतापगढ़, परशुराम कल्याण पदाधिकारी- सदस्य एवं विशिष्टजनों आदि ने स्वागत – वन्दन किया। संचालक सुनील भट्ट ने राष्ट्रभक्ति पर केन्द्रित गीत सुनाकर देशप्रेम का संदेश दिया।

