रांची,07 जून(आरएनएस)। राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच महागठबंधन की बैठकें और रणनीति तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस पर्यवेक्षक अजय शर्मा ने रविवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की.
शनिवार शाम पूर्व राज्यसभा सदस्य और प्रमुख कारोबारी परिमल नाथवानी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की. नाथवानी पहले ही राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खरीद चुके हैं. इस मुलाकात के बाद विभिन्न प्रकार के कयासबाजी शुरू हो गई है.
इसी बीच छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (कांग्रेस के राज्यसभा चुनाव पर्यवेक्षक) और अजय शर्मा ने दोबारो मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर हेमंत सोरेन से करीब दो घंटे से अधिक समय तक बैठक की. बैठक में महागठबंधन की दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा हुई.
बैठक के बाद भूपेश बघेल ने कहा, कहीं कोई दिक्कत नहीं है. महागठबंधन के दोनों उम्मीदवार की जीत होगी. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महागठबंधन के सभी दलों के विधायकों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया है. भूपेश बघेल ने आगे कहा कि झामुमो और कांग्रेस कल एक साथ राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन करेंगे. सहमति बन चुकी है.
परिमल नाथवानी की मुलाकात पर सवाल के जवाब में भूपेश बघेल ने कहा, लोकतंत्र में कोई भी किसी से मिल सकता है. इसका कोई अलग अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. अजय शर्मा ने भी स्पष्ट किया, कहीं कोई किंतु-परंतु नहीं है. गठबंधन दोनों सीटें जीतने जा रहा है. जो भी चर्चाएं हो रही हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है. हमारा गठबंधन पूरी तरह एकजुट है.
मुलाकात के दौरान झामुमो के घोषित प्रत्याशी बैद्यनाथ राम भी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे. उन्होंने बताया कि नामांकन पत्र दाखिल करने की तैयारियों के लिए आए हैं. बैद्यनाथ राम ने कहा कि वे रात्रिभोज में भी शामिल होंगे. नाथवानी की मुलाकात पर बैद्यनाथ राम ने भी भूपेश बघेल की तर्ज पर कहा कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को किसी से मिलने की पूरी स्वतंत्रता है. इसमें कोई खास बात नहीं है. महागठबंधन अब पूरी ताकत के साथ राज्यसभा चुनाव की दोनों सीटों पर मजबूती से उतरने की तैयारी में है.
वहीं, महागठबंधन के सहयोगी भाकपा माले ने साफ संकेत दिया है कि वह बीजेपी को हराने वाली ताकत को वोट देगी. भाकपा माले के विधायक अरूप चटर्जी ने गढ़वा पहुंचकर पार्टी के विरोध मार्च में शामिल होने के दौरान यह बात कही. उन्होंने कहा, जो भाजपा को हराएगी, हम उसी को वोट करेंगे.
अरूप चटर्जी ने आगे कहा कि सरकार में शामिल होने पर उन्हें मंत्री पद मिलना चाहिए था, लेकिन वादे के अनुसार पद नहीं दिया गया. उन्होंने बताया कि एक राज्यसभा सीट तो उनके पार्टी को मिलनी चाहिए थी, लेकिन वह भी नहीं मिली.
विधायक अरूप चटर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी का एकमात्र लक्ष्य भाजपा को हराना है. उन्होंने जोर देकर कहा, जो भाजपा को हराएगी हम उसी को वोट करेंगे.
झारखंड में सत्ताधारी महागठबंधन और विपक्षी भाजपा दोनों ही राज्यसभा चुनाव में जीत का दावा कर रहे हैं. माले जैसे छोटे सहयोगी दल का वोट किस तरफ जाता है, यह दोनों पक्षों के लिए अहम है.
18 जून को मतदान होगा और नतीजों से साफ हो जाएगा कि झारखंड की सियासत में कौन बाजी मारता है. फिलहाल गठबंधन के अंदर तनाव और बीजेपी के खिलाफ एकजुटता का मिश्रित माहौल दिख रहा है.
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