मुनि सान्निध्य में श्रद्धा-भक्ति से संपन्न हुआ विधान
प्रयागराज 7 जून (आरएनएस)। जीरो रोड स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में राष्ट्रसंत, युगद्रष्टा एवं आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के पावन चरण चिन्हों की स्थापना श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और आचार्यश्री के चरण चिन्हों के दर्शन-वंदन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
मुनि श्री 108 वासुपूज्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 अतुल सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में मंत्रोच्चार, पूजन एवं विशेष विधान के साथ स्थापना कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन एवं निर्देशन पंडित संजय जैन एवं पंडित सुनील जैन द्वारा किया गया। विधान के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण एवं जयघोषों से गुंजायमान रहा।
मुनि श्री वासुपूज्य सागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज केवल जैन समाज के ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र की आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक थे। उन्होंने अपने तप, त्याग, ज्ञान और चरित्रबल से करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि चरण चिन्हों की स्थापना का उद्देश्य केवल श्रद्धा प्रकट करना नहीं, बल्कि आचार्यश्री के आदर्शों और जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है।
मुनिश्री ने बताया कि आचार्यश्री ने शिक्षा एवं संस्कारों के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कार्य किए।
मुनि श्री अतुल सागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज का संपूर्ण जीवन तप, त्याग, साधना और समाजोत्थान को समर्पित रहा। उन्होंने दिगम्बर जैन परंपरा में अभूतपूर्व संख्या में दीक्षाएं प्रदान कर विशाल संत परंपरा का निर्माण किया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के जीवन, साहित्य एवं समाजोत्थान में उनके योगदान का स्मरण किया तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। मंदिर परिसर आचार्य श्री के जयघोषों एवं भक्ति गीतों से गुंजायमान रहा।
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