श्रीनगर,08 जून(आरएनएस)। जम्मू-कश्मीर को लद्दाख से जोडऩे वाले ऐतिहासिक जोजिला सुरंग का काम अपने अंतिम पायदान पर पहुंच गया है। मंगलवार 9 जून को 13.15 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग का आखिरी ब्रेकथ्रू होगा, जिससे सुरंग के कश्मीर और लद्दाख के सिरे आपस में जुड़ जाएंगे। समुद्र से 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रहा सुरंग बालटाल (सोनमर्ग) और मीनामर्ग (द्रास और कारगिल) के बीच में स्थित है। सुरंग के शुरू होने से भारत की सामरिक शक्ति काफी हद तक बढ़ेगी।
श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर जोजिला दर्रे से होकर गुजरने वाली सुरंग 9 जून को अपने आखिरी धमाके की गवाह बनेगी। इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मौजूद रहने की संभावना है। ब्रेकथ्रू होने पर पिछले 6 सालों से कश्मीर और लद्दाख की तरफ से काम कर रहे इंजीनियर और मजदूर 9 जून को जमीन के नीचे एक-दूसरे से मिल जाएंगे।ब्रेकथ्रू के बाद सुरंग की लाइनिंग, वेंटिलेशन और फिनिशिंग के कामों में तेजी आएगी।
जोजिला सुरंग के बनने से भारत के सबसे मुश्किल हिमालयी रास्तों में भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और बारिश के बाद भी हर मौसम में कनेक्टिविटी मिलेगी। पहले यह रास्ता खराब मौसम की वजह से लोगों से कटा रहा था। सुरंग बनने से जोजिला दर्रा पार करना 3 घंटे की जगह मात्र 30 मिनट में पूरा होगा। सुरंग प्रोजेक्ट के 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिसे उसी साल के अंत तक लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।
ये सुरंग श्रीनगर और लद्दाख के बीच पूरे साल कनेक्टिविटी देगी, जिससे इससे द्रास, करगिल, लेह और आसपास के इलाकों तक पहुंच बनेगी। यह न केवल संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में आवाजाही को सुनिश्चित करेगा बल्कि लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक पहुंच भी मजबूत होगी। यह मार्ग श्रीनगर-कारगिल-लेह में सैन्य टुकडिय़ों के लिए आपूर्ति मार्ग बनेगा और सैनिक काफिले, उपकरणों, रसद आपूर्ति की आवाजाही में बाधा नहीं आएगी। आम लोग भी इसका फायदा उठाएंगे।
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