तृणमूल के दबंग पुष्पा के घर व पार्टी कार्यालय में भीड़ का तांडव
जगदीश यादव
कोलकाता 8 जून (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल की फलता सीट से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार रहे दबंग व पार्टी सांसद अभिषेक के करीबी कहे जाने वाले जहांगीर खान को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जहांगीर को नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से अपने जाल में समेट लिया। जहांगीर खान देश छोड़कर नेपाल भागने की फिराक में था कि एसटीएफ के हाथ से नहीं बच सका। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसे गिरफ्तार कर कोलकाता लाया जा रहा है। एसटीएफ की टीम ने उसे घेराबंदी कर गिरफ्तार किया वह फरार बताया जा रहा था।
जहांगीर खान के खिलाफ सात मामले दर्ज हैं। एसटीएफ ने जहांगीर खान को पकडऩे के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया। जहांगीर खान के एक सहयोगी का फोन ट्रैक किया गया और एसटीएफ जहांगीर खान तक पहुंच गई। बता दे कि, जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में जहांगीर खान के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया था। उस मामले में उन्हें पहले अदालत से अंतरिम सुरक्षा मिली थी। इसके अलावा, फलता विधानसभा क्षेत्र में पुनर्निर्वाचन से पहले भी उन्हें उच्च न्यायालय से सुरक्षा कवच प्राप्त हुआ था। हालांकि, 26 मई को उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ जारी सभी सुरक्षा आदेश वापस ले लिए, जिसके बाद पुलिस के लिए गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया। जहांगीर खान के खिलाफ हत्या के प्रयास, जबरन वसूली और दंगा भड़काने समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं। जहांगीर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी दर्ज है, जिसकी जांच ईडी कर रही है। बता दें कि जहांगीर को टीएमसी ने हालिया चुनाव में फलता सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था. हालांकि, चुनाव प्रचार के अंतिम दिन जहांगीर खान ने मैदान छोडऩे का ऐलान कर दिया था। बंगाल चुनाव के दौरान जहांगीर खान आईपीएस जय पाल शर्मा को धमकी देकर सुर्खियों में आया था। जहांगीर ने पुष्पा वाले अंदाज में कहा था कि झुकेंगे नहीं। फलता सीट पर चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार को जीत मिली थी। विधानसभा चुनाव के दौरान 29 अप्रैल को अंतिम चरण के मतदान में फलता विधानसभा क्षेत्र के कुछ बूथों पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों में छेड़छाड़ और अन्य गड़बडिय़ों के आरोप भी लगाए गए थे। इसके बाद पुनर्निर्वाचन की मांग उठी और चुनाव आयोग ने पुनर्मतदान का निर्णय लिया था। 4 मई को बाकी सीटों के परिणाम घोषित किए गए थे। जहांगीर खान पहले भी राजनीतिक बयानबाज़ी को लेकर चर्चा में रहे हैं। मतदान से पहले उनके आवास पर सुरक्षा बलों और पुलिस ने छापेमारी की थी। उस दौरान उनके बयानों और चुनावी माहौल को लेकर राज्य की राजनीति में काफी विवाद हुआ था।
जैसे ही फलता के स्थानीय लोगों को जहांगीर खान की गिरफ्तारी की खबर मिली लोग बेकाबू हो गए। दक्षिण 24 परगना के फलता में आक्रोशित लोगों ने उसके दफ्तर पर धावा बोल दिया। लोगों ने दफ्तर का ताला तोड़ दिया और अंदर घुसकर भी तोडफ़ोड़ की। जहांगीर के तृणमूल कार्यालय में तोडफ़ोड़ के दौरान लोगों को शराब की बोतलें और तमाम दस्तावेज मिले है। जिसकी पुलिस जांच कर रही है।
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