केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र के घर जुटी टीएमसी के बागी सांसदों की जमात
ममता के पार्टी के 20 सांसद हो सकते हैं एनडीए की नाव पर सवार
जगदीश यादव
कोलकाता 8 जून (आरएनएस)। कभी तृणमूल में आखिरी लकीर माने जाने वाली बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी और उनके भतीजे ने शायद सपने में यह नहीं सोचा होगा कि उनके इशारों पर उठने-बैठने वाली उनकी पार्टी में नेताओं की एक बड़ी जमात भी उनसे बगावत करेगी और तृणमूल रुपी आशियाने का तिनका-तिनका अलग हो जाएगा। लेकिन कहते है कि राजनीति और क्रिकेट में कब क्या हो जाए कोई कह नहीं सकता। ठीक ऐसा ही हो रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में जब विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक चल रही थी, वहीं दूसरी ओर तृणमूल के कुछ असंतुष्ट सांसदों की अलग बैठक ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खबरों की माने तो, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर तृणमूल कांग्रेस के कई बागी और असंतुष्ट सांसदों ने बैठक की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसद शामिल हुए, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। अंदरखाने की बाहर आई खबरों के अनुसार तृणमूल के लोकसभा सांसदों के एक गुट ने पार्टी से अलग होकर एनडीए को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। 20 से 22 सांसदों का ये गुट लोकसभा में अभिषेक बनर्जी की बजाय काकोली घोष को अपना नेता सदन में बनाना चाहता है। आज ही सोमवार तृणमूल के 14 लोकसभा सांसदों ने बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पर पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकत की। अभी तृणमूल के 28 लोकसभा सांसद और 12 राज्यसभा सांसद हैं। तृणमूल के लोकसभा सांसदों को कोई भी नया गुट बनाने के लिए कम से कम 12 सांसदों की जरूरत होगी। बागी सांसदों ने कम से कम 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया है। हलांकि उक्त खबर के लिखे जाने तक इनलोगों के द्वारा आखिकारिक तौर पर मीडिय़ा में उक्त दावें की पुष्टि नहीं की है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय हुई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं दिल्ली में मौजूद थीं और कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा ले रही थीं। ऐसे में तृणमूल सांसदों की अलग बैठक को राजनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने सांसद पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दिया था और यह तृणमूल के लिए बेहद खराब खबर है। बहरहाल जो भी लेकिन बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या लोकसभा और राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस को किसी बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल पार्टी और बैठक में शामिल नेताओं की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीति के जानकार कह रहें है कि अगर उक्त खबर जो आ रही है अगर प्रमाणिक है तो ममता और अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक करिअर का खात्मा लगभग तय और इस दौर को देखने उनके लिए बेहद तकलीफों वाला हो तो कोई हैरत नहीं होगी।
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