जगदीश यादव
कोलकाता। बंगाल में 15 वर्षों की ममता सरकार क्या गई जैसे बंगाल के अच्छे दिनों की आहट महसूस की गई। जी हां, बंगाल में विकास के पैसे नहीं देने की उलाहना हमेशा बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी देती रहीं है। लेकिन सच तो यह है कि जैसे ही सत्ता बदली और केन्द्र की मोदी सरकार बंगाल के लिए जैसे कूबेर का खजाना खोल दिया। बंगाल के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 10 लाख आवासों के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही राज्य के लिए कुल 1,700 करोड़ रुपये का ग्रामीण विकास पैकेज भी स्वीकृत किया गया है, जिसमें सड़क निर्माण, रोजगार योजनाओं और पेंशन से जुड़ी विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, यह निर्णय हाल ही में राज्य में नई सरकार के गठन के बाद लिया गया है। इसे पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पैकेज से राज्य के ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पडऩे की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 10 लाख घरों के निर्माण और 1,700 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम फंड से बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सीमेंट, छड़ और बालू जैसे स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ग्रामीण मजदूरों को लगातार काम मिलेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार का यह कदम स्पष्ट करता है कि बुनियादी ढांचे के विकास और हर गरीब को पक्का मकान देने के संकल्प में राज्यों का चहुंमुखी विकास पहली प्राथमिकता है। इन परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बता दे कि, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 10 लाख घरों की स्वीकृति को लंबे समय से चल रहे केंद्र और राज्य के बीच ग्रामीण आवास फंड को लेकर विवाद में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है। वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने कथित अनियमितताओं के आरोपों के चलते इस योजना के तहत फंडिंग को रोक दिया था। उस समय लगभग 11.5 लाख घरों के लिए 8,200 करोड़ की राशि आवंटित की गई थी, जिसे बाद में रोक दिया गया था। ऐसे में फंड रोके जाने के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व ममता सरकार ने राज्य के खजाने से करीब 28 लाख आवासों के निर्माण का दावा किया था और केंद्र पर राज्य को उसके हक के फंड से वंचित करने का आरोप लगाया था। अब ताजा मंजूरी के बाद राज्य के लाखों ग्रामीण परिवारों को पक्का घर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 800 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है, जिसका उपयोग राज्य के ग्रामीण इलाकों में सड़कों के निर्माण और सुधार कार्यों में किया जाएगा। इस योजना से दूरदराज के गांवों में सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है, जिससे आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 700 करोड़ की राशि भी मंजूर की गई है। यह योजना राज्य में 100 दिन के रोजगार कार्यक्रम को फिर से गति देने में मदद करेगी, जो जून महीने से पुन: सक्रिय होने की संभावना है। विभिन्न ग्रामीण पेंशन योजनाओं के लिए 600 करोड़ की राशि भी जारी की गई है, जिससे वृद्धावस्था, विधवा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। बहरहाल जो भी हो केंद्र सरकार के इस बड़े फैसले के बाद जमीनी स्तर पर आम लोगों के बीच इसी तरह की सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। 1,700 करोड़ रुपये का यह फंड और 10 लाख नए पक्के घरों की मंजूरी लंबे समय से चल रहे गतिरोध के बाद बंगाल के ग्रामीण इलाकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है।
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