दंतेवाड़ा 11 जून (आरएनएस) हत्या के मामले में जेल से पैरोल पर निकला एक कैदी 21 साल तक कानून की आंखों में धूल झोंकता रहा, लेकिन आखिरकार कटेकल्याण पुलिस ने उसे तेलंगाना से दबोचकर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। नाम बदलकर नई पहचान के साथ फरारी की जिंदगी जी रहे आरोपी का राज उसके ही बेटे से मिली अहम जानकारी के बाद खुला और दो दशक पुराने हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल कर ली।
थाना कटेकल्याण के अपराध क्रमांक 02/2001 में धारा 302, 201 और 34 भादवि के तहत दर्ज हत्या के मामले का आरोपी सोढ़ी मासा पिता कुम्मा, उम्र लगभग 45 वर्ष, निवासी ग्राम गाटम डोंगरीपारा, थाना कटेकल्याण, वर्ष 2001 में हत्या के आरोप में केंद्रीय कारागृह जगदलपुर में बंद था। वर्ष 2005 में उसे 14 दिनों की पैरोल पर घर जाने की अनुमति मिली, लेकिन पैरोल समाप्त होने के बाद वह वापस जेल नहीं लौटा और फरार हो गया। फरारी के दौरान उसने तेलंगाना के कोत्तागुडेम स्थित कासनपल्ली में अपना नाम बदलकर “लालाराम सोढ़ी” रख लिया और वहीं छिपकर रहने लगा।
कटेकल्याण पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी का पुत्र हड़मा उर्फ सुरेश सोढ़ी गांव आया हुआ है। पूछताछ में बेटे ने आरोपी के तेलंगाना में नाम बदलकर रहने की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा और पुलिस अनुविभागीय अधिकारी कटेकल्याण के निर्देशन तथा बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के आदेश पर निरीक्षक निर्मल वर्मा, आरक्षक भीमाराम कोर्राम और डीएसएफ आरक्षक कन्हैया यादव की विशेष टीम तेलंगाना रवाना हुई। टीम ने कोत्तागुडेम से स्थायी वारंटी एवं फरार आरोपी सोढ़ी मासा को गिरफ्तार कर माननीय प्रथम अपर सत्र न्यायालय जगदलपुर में पेश किया, जहां से न्यायालय के आदेश पर उसे फिर से केंद्रीय कारागृह जगदलपुर भेज दिया गया।
इस कार्रवाई में उप निरीक्षक बी.आर. राजपूत, सहायक उप निरीक्षक पूनम साय धुर्वा, प्रधान आरक्षक सुकड़ू राम बघेल, आरक्षक बृजमोहन पैकरा, आरक्षक भीमाराम कोर्राम और डीएसएफ आरक्षक कन्हैया यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बहरहाल, यह गिरफ्तारी साबित करती है कि कानून से बचने के लिए नाम और ठिकाना बदला जा सकता है, लेकिन कानून के लंबे हाथ आखिरकार अपराधी तक पहुंच ही जाते हैं।

