० कुपोषण और लर्निंग गैप मिटाने कलेक्टर और सीईओ ने खुद संभाली कमान
० शबरी ऑडिटोरियम में 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ
सुकमा, 12 जून (आरएनएस)। जिला प्रशासन सुकमा ने नौनिहालों के स्वास्थ्य और शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक बेहद संवेदनशील और अनूठी पहल की है। नीति आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में, आकांक्षी जिला एवं विकासखंड कार्यक्रम के तहत गुरुवार को शबरी ऑडिटोरियम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की गई है। जमीनी स्तर पर लर्निंग गैप (सीखने की कमी) और कुपोषण को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा इस प्रभावशाली और मानवीय दृष्टिकोण वाले कार्यक्रम को सीधे धरातल पर उतारा जा रहा है। कार्यक्रम के शुभारंभ पर खुद कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर ने वहां मौजूद मैदानी स्टाफ का हौसला बढ़ाया।
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने इस मुहिम में भावनात्मक और प्रशासनिक दोनों पक्षों को जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सुकमा के छोटे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे और उनके सर्वांगीण विकास का एक संवेदनशील जरिया है। इसके लिए विशेष रूप से 11 उत्कृष्ट मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। इस नवाचार के तहत अब स्कूली शिक्षकों की ड्यूटी सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों में लगाई जाएगी, जहां वे हर सप्ताह एक घंटा बिताएंगे। यह एक घंटा सुकमा के भविष्य को बदलने वाला साबित होगा, क्योंकि शिक्षक खेल-खेल में बच्चों को अक्षर और शब्दों का ज्ञान देंगे। इस सीधे संवाद से बच्चों की बौद्धिक क्षमता तो बढ़ेगी ही, साथ ही वे आगे की उच्च कक्षाओं के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हो सकेंगे।
इस मुहिम को मानवीय संवेदनाओं से सींचते हुए जिला सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर ने भावुक अपील की कि बच्चे ही हमारे राष्ट्र के निर्माता हैं, इसलिए यह कार्यक्रम किसी सरकारी ड्यूटी से कहीं बढ़कर हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी और जरूरत है। उन्होंने प्रशिक्षण में आए सभी शिक्षकों और कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे आंगनबाड़ी आने वाले हर एक बच्चे को अपने खुद के बच्चे की तरह संभालें, उन्हें दुलारें, सिखाएं और आगे बढऩे के लिए प्रेरित करें। प्रशासन ने इस मानवीय सेवा को सम्मान देने के लिए एक शानदार व्यवस्था भी की है; क्षेत्र में उत्कृष्ट और पूरी लगन से कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए एक विशेष प्रोत्साहन राशि भी निर्धारित की गई है ताकि उनका उत्साह कभी कम न हो।
शिक्षा और स्वास्थ्य के दोहरे मोर्चे पर जिला प्रशासन की यह जुगलबंदी सुकमा के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के लिए एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग के आपसी समन्वय से डिजाइन की गई इस खूबसूरत शैक्षिक पहल की हर तरफ सराहना हो रही है। अधिकारियों की इस संवेदनशीलता और मैदानी अमले के पूरे उत्साह को देखकर यह साफ है कि आने वाले दिनों में सुकमा के आंगनबाड़ी केंद्र न सिर्फ कुपोषण से मुक्त होंगे, बल्कि वहां से निकलने वाले बच्चों की नींव इतनी मजबूत होगी कि वे देश के किसी भी कोने के बच्चों से मुकाबला कर सकेंगे। इस अवसर पर जिला शिक्षधिकारी श्री जीआर मंडावी, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री शिवदास नेताम, श्री रितिश टंडन, नीति आयोग से श्री सौरभ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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