बलौदाबाजार, 12 जून (आरएनएस)। अपराध अनुसंधान को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने की दिशा में बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस द्वारा एक दिवसीय फिंगरप्रिंट प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक ओ.पी. शर्मा के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला में जिले के विभिन्न थाना-चौकियों और पुलिस कार्यालयों के 50 पुलिसकर्मियों ने भाग लिया।पुलिस कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में रेंज फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट एवं उप पुलिस अधीक्षक राकेश नरवरे मुख्य प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट साक्ष्यों के महत्व तथा उन्हें सुरक्षित रखने और एकत्रित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान गंभीर अपराधों के घटनास्थलों से मिलने वाले चांस प्रिंट (उंगलियों के अदृश्य या आंशिक निशान) को सुरक्षित रखने, उनकी पहचान करने और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से लिफ्ट करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि फिंगरप्रिंट किसी भी आपराधिक मामले में सबसे विश्वसनीय और अचूक वैज्ञानिक साक्ष्य माना जाता है, जो अपराधियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यशाला में राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) की कार्यप्रणाली पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षक राकेश नरवरे ने बताया कि इस राष्ट्रीय डेटाबेस के माध्यम से देशभर में किसी भी अपराधी के फिंगरप्रिंट का मिलान कुछ ही समय में किया जा सकता है, जिससे अंतरराज्यीय और संगठित अपराधों की जांच में तेजी आती है।
इसके अलावा गिरफ्तार अपराधियों और संदिग्ध व्यक्तियों के मानक फिंगरप्रिंट स्लिप तैयार करने तथा उन्हें सिस्टम में अपलोड करने की प्रक्रिया का भी सजीव प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षण में MCU/CrPI प्रणाली की उपयोगिता और अपराध अनुसंधान में उसकी भूमिका पर भी जानकारी दी गई।
कार्यशाला के समापन पर पुलिस अधीक्षक ओ.पी. शर्मा के मार्गदर्शन में सभी विवेचकों और पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया गया कि वे घटनास्थल पर पहुंचते ही फिंगरप्रिंट सहित अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित करें, ताकि न्यायालय में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत कर अपराधियों को सजा दिलाई जा सके।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से विवेचना की गुणवत्ता में सुधार होगा और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से अपराध नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
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