कोलकाता 12 जून (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सर्वोच्च नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पार्टी के भीतर मचे आंतरिक विद्रोह और सरकार जाने के बाद अब ममता बनर्जी चौतरफा संकटों से घिर गई हैं। हालिया घटनाक्रम में, चुनावी रैलियों और धार्मिक आयोजनों के दौरान कथित तौर पर ‘धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचानेÓ और ‘भड़काऊ बयानÓ देने के आरोप में उनके खिलाफ हेयर स्ट्रीट थाने में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई है।
यह पूरा मामला विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी द्वारा एक जनसभा के मंच से दिए गए बयान से जुड़ा है। उस समय मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए दिए गए उनके इस बयान की चौतरफा निंदा हुई थी और इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना माना गया था। ममता बनर्जी ने मंच से खुलेआम कहा था कि, “हम हैं, इसलिए आप सब सुरक्षित और अच्छे से हैं। अगर हम नहीं रहे, तो सिर्फ एक सेकंड लगेगा! जब एक कम्युनिटी एकजुट होती है और चारों तरफ से घेर लेती है, तो एक सेकंड में एकदम 12 बजा देगी। अगर आप खुद का 13 नहीं बजवाना चाहते हैं, तो बीजेपी के दुष्प्रचार के झांसे में मत आइए।” उनके इस बयान को लेकर विपक्षी दलों ने उन पर एक खास समुदाय को डराने और धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करने का गंभीर आरोप लगाया था। इस पूरे घटनाक्रम पर राज्य की नई सरकार और भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और कोई भी व्यक्ति देश के संविधान या कानून से ऊपर नहीं है। वहीं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने इन कार्यवाहियों को “घोर राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है। टीएमसी का कहना है कि जब पार्टी नेतृत्व दिल्ली में था, तब जानबूझकर इस तरह की कार्रवाई की गई।
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