एर्नाकुलम (केरल),12 जून(आरएनएस)। भारतीय नौसेना ने एक कमर्शियल क्रूड ऑयल टैंकर के फ्यूल टैंक के अंदर फंसे एक जिंदा मिसाइल वॉरहेड (विस्फोटक) को सुरक्षित बाहर निकालकर निष्क्रिय कर दिया. जिससे समुद्र में एक बड़ा हादसा टल गया. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जहाज के झंडे या इसके विदेशी क्रू की राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना की गई इस त्वरित कार्रवाई ने, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति को एक भरोसेमंद सुरक्षा भागीदार के रूप में मजबूत किया है.
यह घटना एमटी ओलंपिक लाइफ नाम के जहाज की है. टैंकर संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा से कोच्चि बंदरगाह की ओर आ रहा था, तभी 26 मई को ओमान तट के पास इसमें एक धमाका हुआ. चूंकि जहाज में तुरंत कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा था, इसलिए इसने भारत की ओर अपनी यात्रा जारी रखी. बाद में जब जहाज के क्रू ने अंदरूनी जांच की, तो उन्हें जहाज के ढांचे के भीतर एक जिंदा सैन्य गोला-बारूद (मिसाइल का हिस्सा) फंसा हुआ मिला, जिसके बाद तुरंत अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन संदेश (डिस्ट्रेस कॉल) भेजा गया.
जैसे ही इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर फॉर द इंडियन ओशन रीजन ने भारतीय नौसेना को यह बेहद जरूरी अलर्ट भेजा, वैसे ही कई एजेंसियों की आपातकालीन टीमें हरकत में आ गईं. कोच्चि स्थित साउदर्न नेवल कमांड ने पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का जिम्मा संभाला. तुरंत बम निरोधक विशेषज्ञों की बारीक तकनीकी जांच में एक बेहद डरावनी स्थिति सामने आई. एक अत्याधुनिक मिसाइल इस कमर्शियल जहाज की मोटी बाहरी परत को चीरती हुई, अंदर की कई मजबूत दीवारों को तोड़कर सीधे मुख्य फ्यूल स्टोरेज टैंक के अंदर जाकर फंस गई थी.
कच्चे तेल से भरे इतने बड़े टैंक के भीतर एक जिंदा हथियार की मौजूदगी बेहद खतरनाक थी. इसे बाहर निकालने के दौरान मामूली सा घर्षण (रगड़), स्टेटिक चार्ज या एक छोटी सी चिंगारी भी भयंकर ब्लास्ट की वजह बन सकती थी. ऐसा होने पर पूरा जहाज तबाह हो जाता, क्रू मेंबर्स की जान चली जाती और कोच्चि के पास समुद्री पर्यावरण व बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचता.
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए, नौसेना के विशेषज्ञों ने बेहद सावधानी से चरणबद्ध तरीके से इस ऑपरेशन को शुरू किया. उन्नत डिजिटल जांच उपकरणों का उपयोग करके, टीम ने योजनाबद्ध ढंग से मिसाइल के जटिल ब्लास्ट मैकेनिज्म की पहचान की और उसे अलग कर दिया. धमाके के तात्कालिक खतरे को निष्क्रिय करने के बाद, विशेषज्ञों ने जिंदा वॉरहेड को आसपास के धातु के मलबे के साथ सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया.
एक रक्षा प्रवक्ता ने पुष्टि की कि बरामद किए गए मिसाइल के हिस्सों को विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए कोच्चि में नौसेना की एक अत्यधिक सुरक्षित फैसिलिटी (केंद्र) में ले जाया गया है, जिसका उद्देश्य इस हथियार की तकनीकी विशिष्टताओं और इसके उद्गम की पहचान करना है. सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस खतरनाक मिशन का सफल समापन बम निरोध के क्षेत्र में भारतीय नौसेना की विश्व स्तरीय क्षमता, इसकी तकनीकी विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों के साथ इसके बेहतरीन समन्वय को दर्शाता है.
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