कोलकाता 15 जून (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल की सत्ता से तृणमूल कांग्रेस के बेदखल होते ही पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है। इस सियासी फेरबदल का सीधा असर कोलकाता नगर निगम (केएमसी) पर पड़ा है, जहां पार्षदों के विद्रोह के बाद पुरबोर्ड पूरी तरह भंग हो चुका है। इस बीच, शहर वासियों के मन में सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि, ‘कोलकाता में निकाय चुनाव कब होंगे?Ó ऐसे में बंगाल के सीएम
शुभेंदु अधिकारी ने आज बड़ा और आधिकारिक बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी 7 दिसंबर 2026 तक कोलकाता को नया पुरबोर्ड मिल जाएगा, यानी अगले 6 महीनों के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। केएमसी के एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने निगम में प्रशासक बैठाए जाने की मजबूरी को जनता के सामने रखा। टीएमसी के आंतरिक कलह पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “मैंने पिछले बोर्ड से भी बात की थी, लेकिन वे इसे संभाल नहीं सके। निवर्तमान मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद जब नया मेयर चुनने के लिए दस्तखत अभियान शुरू हुआ, तो टीएमसी के 135 पार्षदों में से अधिकांश इसके खिलाफ खड़े हो गए। वहां हर कोई मेयर बनना चाहता था! अब अगर हर कोई मेयर पद की दौड़ में शामिल हो जाएगा, तो मैं कुछ नहीं कर सकता। लेकिन हम एक मिनट के लिए भी नागरिकों की सेवाएं बंद नहीं रख सकते, इसीलिए मजबूरन हमें प्रशासक नियुक्त करना पड़ा।”
मुख्यमंत्री ने कोलकाता के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा, “कोलकाता नगर निगम की अपनी एक समृद्ध विरासत है। कभी नेताजी सुभाष चंद्र बोस यहां के मेयर हुआ करते थे। मैं इसके गौरव और इसकी परंपरा को धूमिल होने नहीं दे सकता।”
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती टीएमसी बोर्ड पर शहर के लिए कोई काम न करने का आरोप लगाया। उन्होंने एलान किया कि नई सरकार कोलकाता के शहरी परिदृश्य को बदलने और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 600 करोड़ की राशि आवंटित कर सकती है। आगामी चुनाव को लेकर उन्होंने कहा, “7 दिसंबर तक बोर्ड गठन से पहले वार्डों का नए सिरे से पुनर्गठनकिया जाना बेहद जरूरी है। हमारी सरकार चाहती है कि जहां-जहां भी इस समय प्रशासक हैं, वहां जल्द से जल्द लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव हों।”
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