मीरजापुर 17 जून (आरएनएस)। विंध्य क्षेत्र में बाणसागर परियोजना का पानी कृषि क्षेत्र में नई क्रांति का आधार बनता जा रहा है। कभी सिंचाई संकट और पलायन के लिए पहचान रखने वाला इलाका अब व्यावसायिक खेती के मॉडल के रूप में उभर रहा है। इसी बदलाव को समझने के लिए बाणसागर परियोजना के मुख्य अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव ने बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चार से पांच किलोमीटर पैदल भ्रमण कर किसानों से सीधा संवाद किया और खेती में आए बदलावों का आकलन किया। मेजा-जरगो लिंक नहर से सिंचित तेंदुआ, बहुती, कठवार समेत कई गांवों के भ्रमण के बाद वाराणसी-रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित पांडेपुर में प्रगतिशील किसान परमेश्वर मौर्य के साथ विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में व्यावसायिक खेती के विस्तार, आधुनिक तकनीकों के प्रयोग, उत्पादन और विपणन व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य अभियंता ने किसान परमेश्वर मौर्य से पूछा कि सीमित संसाधनों से शुरू हुई खेती आज किस प्रकार बड़े स्तर के कृषि उद्यम में बदल गई। किसान ने बताया कि बाणसागर परियोजना से नियमित सिंचाई सुविधा मिलने के बाद क्षेत्र के किसानों ने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर बाजार आधारित नकदी फसलों का उत्पादन शुरू किया। खरबूजा, सब्जी एवं अन्य व्यावसायिक फसलों की पैदावार अब स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं है बल्कि वाराणसी, मिर्जापुर, रीवा और मध्य प्रदेश के विभिन्न बाजारों तक पहुंच रही है।परमेश्वर मौर्य ने बताया कि वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ से मंगाए गए ग्राफ्टिंग बैंगन की उन्नत किस्म की खेती कर रहे हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रयोग से उत्पादन और लाभ दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि सिंचाई की उपलब्धता ने किसानों को जोखिम कम करने और अधिक लाभ वाली फसलों की ओर बढऩे का अवसर दिया है। भ्रमण के दौरान किसानों ने अधिकारियों को बताया कि रानीबारी, सहिरा, तिखोर, अमहा, हर्दिहा, पुरुषोत्तम पट्टी और आसपास के गांवों में कभी रोजगार के लिए बड़े पैमाने पर पलायन होता था। आज वही क्षेत्र व्यावसायिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीक और बढ़ती किसान आय के कारण नई पहचान बना रहा है। मुख्य अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बाणसागर परियोजना केवल सिंचाई योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम बन चुकी है। उन्होंने कहा कि परियोजना क्षेत्र में किसानों की मांग के अनुरूप पानी उपलब्ध कराया जाएगा और व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा। अधीक्षण अभियंता ओ.पी. मौर्य, शशि प्रकाश शुक्ला, अधिशासी अभियंता मेराज अहमद, अशोक यादव, श्याम किशोर गुप्ता तथा अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस संवाद ने स्पष्ट किया कि बाणसागर परियोजना के कमांड क्षेत्र में कृषि अब केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि रोजगार और समृद्धि का मजबूत आधार बनती जा रही है।
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