रायपुर 17 जून आरएनएस जिस कर्मचारी पर कंपनी आंख बंद कर भरोसा करती थी, वही 10 लाख रुपये की लूट का मास्टरमाइंड निकला। एक महीने तक साजिश बुनी गई। अपने ही भाई और उसके साथी को मैदान में उतारा गया। चाकू दिखाकर दिनदहाड़े 10 लाख रुपये लूट लिए गए, लेकिन पुलिस की पैनी नजर, तकनीकी जांच और हजारों सीसीटीवी कैमरों ने 24 घंटे के भीतर पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया।
मामला मंदिर हसौद थाना क्षेत्र का है। 16 जून की शाम कंपनी का कर्मचारी विद्यासागर डहरिया मजदूरों के भुगतान के लिए 10 लाख रुपये लेकर समता कॉलोनी से नया रायपुर जा रहा था। सेरीखेड़ी ओवरब्रिज के पास स्कार्फ से चेहरा ढके दो बदमाशों ने उसकी बाइक रोक ली। चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी और रुपये से भरा बैग लेकर फरार हो गए। वारदात के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। डीसीपी क्राइम एवं साइबर स्मृतिक राजनाला और रायपुर ग्रामीण एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा मंदिर हसौद पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए। तकनीकी विश्लेषण किया गया। हजारों सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ हुई तो ऑफिस बॉय दिनेश राव की गतिविधियां संदिग्ध मिलीं। सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने पूरा सच उगल दिया।
आरोपी ने बताया कि वह वर्ष 2022 से कंपनी में काम कर रहा था और उसे नकदी के आवागमन की पूरी जानकारी रहती थी। उसने करीब एक माह पहले अपने भाई और उसके साथी के साथ लूट की योजना बनाई। घटना वाले दिन उसने अपने भाई को फोन कर बुलाया, विद्यासागर की पहचान कराई और दोनों ने चाकू की नोक पर लूट की वारदात को अंजाम दिया। बाद में अमलेश्वर में तीनों मिले, जहां 30 हजार रुपये साथियों को देकर 9 लाख 70 हजार रुपये खुद रख लिए। पुलिस ने आरोपी दिनेश राव (22 वर्ष), निवासी ग्राम सिरौलमू, थाना छत्तरपुर बरमपुर, जिला गंजाम (ओडिशा), हाल निवासी चौबे कॉलोनी, रायपुर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 9.70 लाख रुपये नकद, वारदात में प्रयुक्त बर्गमैन स्कूटर क्रमांक CG 04 QK 6037 और एक मोबाइल फोन बरामद किया। कुल 10.80 लाख रुपये का मशरूका जब्त किया गया है। आरोपी के खिलाफ थाना मंदिर हसौद में अपराध क्रमांक 286/26 के तहत धारा 309(4) एवं 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज किया गया है। उसके दो फरार साथियों की तलाश जारी है।
बहरहाल, यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सबसे बड़ा खतरा कई बार बाहर से नहीं, बल्कि भरोसे के दायरे के भीतर छिपा होता है और कानून की पकड़ से बच पाना आसान नहीं।


