वाशिंगटन,19 जून। ईरान के साथ समझौते को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता तेहरान का बिना शर्त आत्मसमर्पण है। उन्होंने आगे दावा किया कि उनकी शक्ति की कोई सीमा नहीं है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने युद्ध को वैश्विक आर्थिक मंदी में बदलने से रोकने के लिए यह समझौता किया है।
ट्रंप ने कहा, मैंने इस समझौते पर बातचीत इसलिए की, ताकि यह वैश्विक आर्थिक मंदी का रूप न ले ले। मैं और सख्त तभी हो सकता हूं जब मैं 2-3 हफ्ते के लिए वहां जाकर उन पर लगातार बमबारी करता रहूं। है ना? लेकिन इससे हमें क्या मिलेगा? होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो जाएगा। हमें महीनों तक तेल नहीं मिलेगा। इस तरह की चीजें वैश्विक मंदी का कारण बन सकती हैं।
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या युद्ध ने उन्हें अपनी शक्ति की सीमाओं के बारे में सिखाया है, तो उन्होंने कहा, मैंने अभी तक यह सबक नहीं सीखा है। मैं जानता हूं कि सीमाएं हैं, लेकिन कोई सीमा नहीं है। ऐसी नाकाबंदी और कौन कर सकता था? मैंने नौसैनिक नाकाबंदी की थी जिसमें एक भी जहाज पार नहीं कर पाया। कुछ ने कोशिश की थी, लेकिन यह ज्यादा देर तक नहीं चली।
समझौता होने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी हटा ली है। अमेरिकी सेना ने यह भी कहा कि अमेरिकी युद्धपोत उस क्षेत्र में मौजूद रहेंगे। समुद्री निगरानीकर्ताओं के अनुसार, बीते दिन 3 तेल टैंकर और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस से लदा एक फ्रांसीसी जहाज होर्मुज से गुजरा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बुधवार रात को होर्मुज जलडमरूमध्य से 12.5 अरब बैरल से ज्यादा तेल गुजरा है।
ईरान-अमेरिका के बीच समझौते को लेकर अभी भी कई अनिश्चितताएं हैं। दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में आज होने वाली वार्ता भी टाल दी गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने स्विट्जरलैंड की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है। साथ ही समझौते में कई मुद्दों पर अभी भी बारीक-बारीक बातें तय नहीं हैं। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसकी फ्रीज की हुई संपत्ति से जुड़ी बातें शामिल हैं। इजरायल के रुख ने भी जटिलताएं पैदा की हैं।
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