स्मार्ट मीटर बना रहा हर आदमी को बेवकुफ,बढ़ रही परेशानी।
केशव सल्होत्रा
जगदलपुर 19 जून 2026(आरएनएस) बिजली की बढ़ी हुई दरों के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पूर्व विधायक जगदलपुर रेखचंद जैन ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की सरकार लोगों को बिजली का झटका दे रही है। लंबे चौड़े बिल देख लोगों के होश गुम हो रहे। जहां पिछले माह तक हजार दो हजार के बिल आ रहे थे इस माह वहां भी चार – पांच हजार रुपये के बिल थमाए जा रहे हैं। राज्य की भाजपा सरकार को आमजनता की दयनीय होती जा रही हालत से कोई लेना देना नहीं है। जनता के दुख दर्द से भाजपा का कोई वास्ता नहीं रह गया है. भाजपा सरकार को श्वेत पत्र जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। राज्य में ऐसी स्थिति तब है जब छत्तीसगढ़ स्टेट की गणना सरप्लस स्टेट के रूप में की जाती है। यहां न केवल कोयला के खदान हैं बल्कि कोयला आधारित बिजलीघरों की स्थापना भी की गई है। इन परिस्थितियों में इस माह बिजली बिल में बेतहाशा वृद्धि से आमलोगों की कमर टूट गई है। एक तरफ मुख्यमंत्री स्वयं को गरीब परिवार का कहते हैं तो दूसरी तरफ इन गरीब परिवारों की सुध लेना छोड़ अमीर आदमी की गोद में बैठे दिख रहे हैं। मध्यम वर्ग के लोग तो जैसे तैसे बिजली बिल भर दे रहे हैं लेकिन दो जून की रोटी के लिए काम करने वाले परिवारों के लिए मुख्यमंत्री का चिंतित न होना खेदजनक व चिंताकारक है।
प्लान मेंटेनेंस के नाम पर बिजली कटौती
पूर्व विधायक ने कहा है कि राज्य में जब से भाजपा सत्ता में आई है तब से बिजली कटौती बढ़ गई है। प्लान मेंटेनेंस के नाम पर हो रही घंटों की बिजली कटौती से न केवल आम उपभोक्ता परेशान हो रहा है बल्कि घरेलू उद्योग – धंधे भी चौपट हुए जा रहे हैं। जैन ने कहा है कि इस साल अब तक दर्जनों बार प्लान मेंटेनेंस के नाम पर बिजली कटौती की गई है। पहले जहां मानसून पूर्व ऐसे किया जाता था वहीं अब साल भर बिजली कटौती इस नाम पर की जाती है। इस ओर राज्य सरकार का ध्यान न जाना इस बात की ओर स्पष्ट संकेत करता है कि भाजपा को जनता की कोई फ़िक्र नहीं है।
स्मार्ट मीटर ने बढ़ाई परेशानी
सरकार मोर बिजली एप के माध्यम से स्मार्ट मीटर का प्रचार कर रही है। उत्तरप्रदेश जैसे राज्य में भाजपा सरकार ने जनआक्रोश के चलते जिस स्मार्ट मीटर को किनारे लगा दिया है छत्तीसगढ़ में सरकार इसके प्रचार प्रसार में जुटी है। स्मार्ट मीटर से जनता को हो रही तकलीफ की तरफ ध्यान देने की बजाय राज्य सरकार अपने मित्र अडानी को खुश करने में लगी है।

