बिलासपुर20 जून (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षाकर्मी में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि, यदि दिवंगत पंचायत शिक्षक का आश्रित शिक्षक पद के लिए आवश्यक योग्यता नहीं रखता है, तो इस आधार पर उसकी अनुकंपा नियुक्ति की मांग को खारिज नहीं किया जा सकता है।कोर्ट ने ने इसे अनुचित और मनमाना निर्णय माना है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने दुर्ग जिला पंचायत द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि आवेदक की शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप किसी स्वीकृत एवं रिक्त चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार किया जाए।दरसअल, दुर्ग जिले में पदस्थ सहायक शिक्षक (पंचायत) चमन लाल वर्मा का 15 अक्टूबर 2015 को सेवा के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद उनके पुत्र राकेश कुमार वर्मा ने 23 सितंबर 2016 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि, जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 30 जुलाई 2018 को आवेदन यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि आवेदक के पास शिक्षक पद के लिए आवश्यक डीएड, बीएड अथवा टीईटी जैसी अनिवार्य योग्यताएं नहीं हैं।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बी.पी. राव ने तर्क दिया कि अनुकंपा नियुक्ति संबंधी सरकारी नीतियों में समय-समय पर बदलाव हुए हैं। उन्होंने बताया कि पहले की व्यवस्था में योग्य आश्रितों को सीधे सहायक शिक्षक बनाया जा सकता था, जबकि बाद की नीति में शिक्षक पद की योग्यता नहीं होने पर ग्राम पंचायत सचिव पद पर नियुक्ति का प्रावधान किया गया था। बाद में नई नीति लागू होने से कई आश्रितों के लिए अनुकंपा नियुक्ति के अवसर सीमित हो गए। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि यदि शिक्षक या सचिव पद के लिए आवश्यक योग्यता उपलब्ध नहीं थी, तो प्रशासन को आवेदक की शैक्षणिक योग्यता के आधार पर किसी अन्य उपयुक्त, विशेषकर चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति पर विचार करना चाहिए था।
त्रिपाठी
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