मुंबई,20 जून(आरएनएस)। महाराष्ट्र के चर्चित पवनराजे निंबालकर हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला आया है। मुंबई की विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कोर्ट ने मामले में हत्याकांड के मुख्य आरोपी पूर्व गृहमंत्री डॉक्टर पद्मसिंह पाटिल समेत सभी 9 आरोपियों को बरी कर दिया है। इसके पीछे सबूतों की कमी का हवाला दिया गया है। बता दें कि निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की 2006 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पूर्व मंत्री और मुख्य आरोपी पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल सरकारी गवाह की गवाही के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा, सरकारी गवाह के बयानों में लगातार विरोधाभास पाए गए हैं, जिससे उसके बयान पर भरोसा करना संभव नहीं है। संदेह का लाभ देते हुए न्यायालय सभी आरोपियों को बरी कर रहा है।
इस मामले के मुख्य आरोपियों में पूर्व एनसीपी नेता पद्मसिंह पाटिल भी थे। उनके अलावा सतीश मंदाडे, पूर्व नगरसेवक मोहन शुक्ला, पारसमल जैन, पूर्व आबकारी निरीक्षक शशिकांत कुलकर्णी और बसपा कार्यकर्ता कैलाश यादव भी आरोपी थे। पवनराजे और उनके ड्राइवर समद काजी पर गोलीबारी करने वाले दिनेश तिवारी, पिंटू सिंह और छोटे पांडे ये तीनों भी बरी कर दिए गए हैं। पवनराजे के बेटे और उद्धव गुट के सांसद ओमराजे निंबालकर 20 साल से यह मामला लड़ रहे हैं।
कोर्ट ने जांच की खामियों पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि मोबाइल फोन जब्त नहीं किए गए, कॉल डिटेल रिकॉर्ड नहीं मंगाए गए और गिरफ्तारी के समय आरोपियों के पास क्या सामान था, इसका भी जानकारी दर्ज नहीं की गई। कोर्ट ने कहा कि अगर मोबाइल जब्त होते तो नंबरों के आधार पर यह पता लगाया जा सकता था कि कौन किसके संपर्क में था। जज ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी।
पवनराजे और उनके ड्राइवर की 3 जून, 2006 को नवी मुंबई में हत्या कर दी गई थी। तब दोनों मुंबई से उस्मानाबाद जा रहे थे, तभी हमलावरों ने उनकी कार पर अंधाधुंध गोलीबारी की। मामले की शुरुआती जांच नवी मुंबई पुलिस ने की, लेकिन बाद में सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने 2009 में पद्मसिंह को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि राजनीतिक और कारोबारी प्रतिद्वंद्विता में पद्मसिंह ने अपने चचेरे भाई पवनराजे की हत्या की साजिश रची थी।
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