रायपुर, 20 जून (आरएनएस)। राजधानी रायपुर के न्यायालय परिसर में एक फर्जी वकील का मामला सामने आया है। अधिवक्ता संघ प्रबंधकारिणी की सतर्कता से आरोपी को पकड़कर सिविल लाइन्स पुलिस के हवाले किया गया। आरोपी खुद को अधिवक्ता बताकर लोगों से संपर्क कर रहा था और कानूनी मामलों में मदद के नाम पर रकम वसूल रहा था।जानकारी के अनुसार, आरोपी ने अपनी पहचान हरीश डहरिया के रूप में बताई थी और न्यायालय परिसर में वकालत से जुड़े कार्य करता पाया गया। संदेह होने पर अधिवक्ता संघ ने उससे शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेज मांगे। जांच में उसकी असली पहचान मनीष कुर्रे के रूप में सामने आई।अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने अपने विजिटिंग कार्ड और व्हाट्सएप प्रोफाइल पर खुद को वकील दर्शा रखा था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि उसने एक पक्षकार से जमानत कराने के नाम पर 10 हजार रुपए लिए थे।पूछताछ में आरोपी ने दावा किया था कि वह बीए, बीकॉम, एलएलबी और एलएलएम की डिग्रीधारी है, लेकिन वह किसी भी दावे के समर्थन में वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। उसके आधार कार्ड में उम्र मात्र 20 वर्ष दर्ज पाई गई।पूछताछ के दौरान आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि उसके साथ पांच अन्य लोग जुड़े हुए हैं, जो इसी प्रकार की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। अधिवक्ता संघ का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों में फर्जी डिग्रियों के सहारे सक्रिय ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।फिलहाल सिविल लाइन्स पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके साथ जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है। मामले ने न्यायालय परिसर की सुरक्षा और अधिवक्ताओं की पहचान सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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