सारंगढ़-बिलाईगढ़ 23 जून (आरएनएस) विकास, सुशासन और सामाजिक सुधारों को लेकर प्रशासन ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने साफ संकेत दिया है कि अब स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने, कुपोषण और बाल विवाह पर रोक लगाने, अवैध कब्जों की जांच करने तथा अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
मंगलवार को आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने विभिन्न विभागों के प्रगतिरत कार्यों, मुख्यमंत्री जनदर्शन, कलेक्टर जनदर्शन तथा अन्य माध्यमों से प्राप्त आवेदनों की समीक्षा की। बैठक की शुरुआत सड़क सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा से हुई, जहां सालर, टिमरलगा और टूंडरी जैसे दुर्घटना संभावित स्थलों पर आवश्यक चेतावनी और संकेतक बोर्ड लगाने के निर्देश राष्ट्रीय राजमार्ग अधिकारियों को दिए गए। वहीं नशा मुक्ति केंद्रों में प्रभावी काउंसलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
कलेक्टर ने राजस्व और नगरीय निकाय विभागों को समन्वय बनाकर भूमि से जुड़े नए और पुराने दस्तावेजों की जांच करने तथा अवैध कब्जों और फर्जी दस्तावेजों के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण कर हितग्राहियों को की गई कार्रवाई की जानकारी देने पर विशेष बल दिया।
बैठक में जिले को कुपोषण मुक्त और बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। आयुष्मान भारत, टीकाकरण, कुष्ठ नियंत्रण और जीवनदीप समिति की बैठकों को नियमित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्लोरीनीकरण सुनिश्चित करने को कहा गया।
शिक्षा के क्षेत्र में कलेक्टर ने स्कूल छोड़ चुके बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पुनः स्कूल, आश्रम और छात्रावासों में प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए। साथ ही मुफ्त पाठ्यपुस्तक वितरण, जाति प्रमाण पत्र निर्माण और विद्यार्थियों से जुड़ी अन्य योजनाओं की प्रगति तेज करने को कहा। प्रधानमंत्री आवास, पीएम स्वनिधि, सुगघर छत्तीसगढ़, धरती आबा अभियान, सामुदायिक शौचालय, ई-ऑफिस, आधार कार्ड, राशन कार्ड ई-केवाईसी और खाद-बीज वितरण जैसे कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि राजस्व प्रकरणों, सीमांकन, फौती नामांतरण, त्रुटि सुधार, भूमि आबंटन और न्यायालयीन मामलों के निराकरण में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को तय समय सीमा में परिणाम देने के निर्देश दिए गए।
गौरतलब है कि प्रशासन अब केवल योजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि शिक्षा, पोषण, सुशासन और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के जरिए जिले में जमीनी बदलाव लाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

