लोरमी, 23 जून (आरएनएस)। बिहार के चर्चित भारत तिवारी एनकाउंटर मामले की गूंज अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। मुंगेली जिले के लोरमी में ब्राह्मण समाज के नेतृत्व में सर्व समाज की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न समाजों के पदाधिकारियों और नागरिकों ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा की।
बैठक में उपस्थित लोगों ने भारत तिवारी के कथित एनकाउंटर को संदेहास्पद बताते हुए इसे गंभीर मामला करार दिया और पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। इस दौरान भारत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन भी रखा गया।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पीडि़त परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए शासन से एक करोड़ रुपये मुआवजा दिए जाने की मांग की जाएगी। इसके लिए महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन तैयार किया गया है, जिसे राज्यपाल के माध्यम से जल्द सौंपा जाएगा।
समाज प्रतिनिधियों का कहना है कि इस घटना से देशभर में आक्रोश व्याप्त है और पीडि़त परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
गौरतलब है कि बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव में 17 जून को हुए कथित पुलिस एनकाउंटर में भारत तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि मुठभेड़ के दौरान आत्मरक्षा में गोली चलाई गई, जबकि परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि आत्मसमर्पण करने और हथियार फेंकने के बाद भी भारत तिवारी को गोली मारी गई।
मामले में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें भारत तिवारी के आत्मसमर्पण करने का दावा किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।
इस मामले में बिहार के एडीजी सुधांशु कुमार ने स्वीकार किया कि 16 जून को भारत तिवारी से बातचीत करने पहुंचे पुलिस अधिकारियों द्वारा स्थिति को सही तरीके से नहीं संभाला गया, जो गंभीर चूक थी। लापरवाही के आरोप में एक थाना प्रभारी, दो सब-इंस्पेक्टर, एक एएसआई और एक आरक्षक को निलंबित कर दिया गया है।
वहीं, बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर एसपी से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को प्रस्तावित है।
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