0 गेल और बीपीसीएल 6 नगर निगमोंं में बनाएगा संयंत्र
रायपुर, 24 जून (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ में स्वच्छ ऊर्जा और कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, गेल (इंडिया) लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के बीच त्रि-स्तरीय समझौते के तहत राज्य के आठ नगर निगम क्षेत्रों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से कम्प्रेस्ड बायोगैस उत्पादन संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
गेल अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा में सीबीजी प्लांट स्थापित करेगा, जबकि बीपीसीएल बिलासपुर, धमतरी और राजनांदगांव में परियोजनाओं का क्रियान्वयन करेगा। कैबिनेट ने रायपुर और भिलाई नगर निगम को इसमें शामिल किया है, इसके लिए बायोफ्यूल विकास प्राणिकरण एजेंसी तय करेगा।
परियोजना के तहत प्रतिदिन लगभग 350 मीट्रिक टन शहरी ठोस अपशिष्ट और 500 मीट्रिक टन अतिरिक्त बायोमास का उपयोग कर करीब 70 मीट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन किया जाएगा। इन परियोजनाओं में लगभग 600 करोड़ रुपये का निवेश गेल और बीपीसीएल द्वारा किया जाएगा। राज्य सरकार के अनुसार इस पहल से शहरों में कचरे के वैज्ञानिक निपटान को बढ़ावा मिलेगा, स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा तथा जैविक खेती के लिए उपयोगी सह-उत्पाद भी प्राप्त होंगे। साथ ही ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी और छत्तीसगढ़ को नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में आगे बढऩे में मदद मिलेगी।
छत्तीसगढ़ को दिलाएगा नई पहचान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह समझौता छत्तीसगढ़ को स्वच्छता, हरित ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने वाला साबित होगा तथा वेस्ट टू एनर्जी की परिकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसानों, गौपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह नीति नए अवसर लेकर आएगी। कृषि अवशेषों एवं जैविक अपशिष्टों के बेहतर उपयोग से किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।
कृषि अवशेष, गोबर और जैविक अपशिष्ट से हरित ऊर्जा
छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, हरित औद्योगिकीकरण, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। छत्तीसगढ़ में कृषि एवं फसल अवशेष, पैडी स्ट्रॉ, पशु गोबर, पशुधन अपशिष्ट, नगरीय ठोस अपशिष्ट, प्रेसमड, गन्ना अवशेष तथा नेपियर जैसी ऊर्जा फसलों से प्रतिवर्ष लगभग 1.65 लाख मेट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन की संभावना है। इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी।
सह उत्पाद जैविक खाद से प्राकृतिक एवं जैविक खेती
नई नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रतिवर्ष लगभग 2.16 लाख टन पेट्रोल एवं डीजल के समतुल्य ईंधन की आपूर्ति सीबीजी के माध्यम से की जा सकेगी। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ-साथ देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी। सीबीजी संयंत्रों से सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त जैविक खाद के उपयोग से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, भूमि की उर्वरता संरक्षित रहेगी और टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहन मिलेगा।
एसएस
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