बीजापुर, 24 जून (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ शासन, खनिज साधन विभाग के द्वारा विगत दिनों गौण खनिजों नियमों मे परिवर्तन को केबिनेट की बैठक में मंजूरी प्राप्त हो चुकी थी जिसके तहत संशोधित नियमों का प्रकाशन हो चुका है।
नियमों में संशोधन के कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:- खनिजों के अवैध उत्खनन/भण्डारण/परिवहन के मामलों में प्रशमन की राशि में बढ़ोतरी:- उच्च न्यायालय बिलासपुर में दर्ज जनहित 66/2023 में पारित निर्णय के परिपेक्ष्य में राज्य शासन द्वारा गठित समिति के प्रस्ताव/सुझावे अनुशंसा के आधार पर प्रदेश के समस्त जिलों में खनिजों के अवैध उत्खनन/परिवहन/भंडारण प्रकरण के निराकरण में एकरूपता लाये जाने एवं प्रभावी नियंत्रण करने के उद्देश्य से यह संशोधन किया गया है। इस संशोधन में खनिजों के अवैध उत्खनन/भण्डारण के मामलों में, उस अपराध के लिये अभियोजन संस्थित किये जाने के पूर्व या पश्चात् यदि दोषी व्यक्ति द्वारा प्रशमन, अपराध का प्रशमन कर प्रकरण समाप्त करना चाहता हो तो, न्यूनतम प्रशमन राशि जो किसी भी मामले में हो पच्चीस हजार के कम नहीं होगी। परन्तु अवैध खनिज परिवहन के मामले में परिवहित खनिज मात्रा के विरूद्ध धारा 21 (5) अनुसार राशि के अतिरिक्त धारा 23क अनुसार प्रतिटन दो हजार रूपये की दर से प्रशमन राशि, किन्तु किसी भी मामले में पच्चीस हजार के कम नहीं होगी। स्पष्ट है कि खनिज नियमों के तहत न्यूनतम समझौता राशि 25000 से कम नहीं होगी, यदि कोई वाहन 35 टन खनिज अवैध परिवहन कर रहा है तो उसे समझौता राशि के रुप में 2000/- प्रति टन की दर से 70 हजार रुपये समझौता शुल्क तथा 35 टन खनिज का मुल्य अतिरिक्त देना होगा। ट्रेक्टर से रेत परिवहन पर भी 25000 रुपय समझौता शुल्क तथा 5 टन रेत खनिज का मुल्य अतिरिक्त देना होगा।
कई मामलों में यह भी देख जा रहा था कि अवैध खनिज परिवहन/उत्खनन कर्ता सीधे सक्षम न्यायालय में वाहन सुपूर्दगी प्राप्त करने आवेदन कर देता था तथा सुपूर्दगी प्राप्त कर पुन: अवैध उत्खनन/परिवहन में उक्त वाहन का उपयोग करने लग जाता है इसे देखते हुए अवैध उत्खनन/परिवहन/भण्डारण में जप्त वाहन/मशीन/खनिज या अन्य जप्त सामग्री को सुपुर्दी दिये जाने संबधी अंतिम निर्णय के पूर्व किसी भी सक्षम न्यायालय को वाहन के प्रकार अनुरुप 50 हजार से तीन लाख रुपय तक जमानत राशि जमा नियम 46 (क) में निर्धारित सुरक्षा जमा मद में जमा कराये जाने उपरांत ही संलिप्त वाहन को सुपुर्दगी में दिया जा सकेगा।
उत्खनन अनुज्ञापत्र हेतु रकबा एवं अवधि में बढ़ोतरी:-
शासकीय निर्माण कार्य हेतु उत्खनन अनुज्ञापत्र दिये जाने हेतु रकबा 1 हेक्टेयर से बढ़ा कर 2 हेक्टेयर किया गया है तथा अनुज्ञापत्र की अवधि को 2 वर्ष से बढ़ा कर 3 वर्ष किया गया है। खनन हेतु क्षेत्र बढ़ाने से निर्माण कार्य हेतु अधिक खनिज मात्रा प्राप्त हो सकेगी तथा व्यवस्थित माईनिंग किया जा सकेगा तथा अवधि बढ़ाने से खनन पूर्व आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने में लगने वाले समय के अनुरुप पट्टेदार अधिक अवधि तक खनन कर पायेगा।
छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेशण न्यास 2025:- खनिज अन्वेशण, व्यवस्थित विकास और बुनियादी ढाँचे के विकास को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेशण न्यास 2025 की स्थापना 12 सितम्बर 2025 की गई। इसके अंतर्गत गौण खनिज पट्टा एकत्रित रॉयल्टी का 2 प्रतिशत ट्रस्ट में जमा कराया जायेगा इससे प्रतिवर्ष गौण खनिजों से जमा रायल्टी के अतिरिक्त 2 प्रतिशत राशि अनुमानित राशि 5.25 करोड़ रुपये न्यास में प्राप्त होगा।
पट्टा का समामेलन में सरलीकरण:- वर्तमान में उत्त्खनन पट्टे विभिन्न रीति से स्वीकृत किया जा रहा है। जैसे बिना ई-नीलामी/निविदा अथवा ई-नीलामी/निविदा अथवा निजी भूमि के प्ररकणों में प्रीमीयम राशि लिया जाकर। ऐसे में पट्टों का समामेलन करने से शासन को अलग-अलग मद में राशि प्राप्त होनें से पट्टा का समामेलन करने में व्यवहारिक कठिनाई आ रहा थी इसके दृष्टिगत नवीन प्रावधान किये गये हैं इससे बिना ई-नीलामी/निविदा की प्रक्रिया से स्वीकृत अथवा निजी भूमि के प्रकरणों में पट्टों का समामेलन से प्रीमीयम राशि प्राप्त होगी।
निर्माण विभागों में खनिज रायल्टी कटौती की दरों में एकरुपता:- राज्य के निर्माण विभागों में रायल्टी कटौती एवं रायल्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने में एकरूपता सुनिश्चित करने बाबत् नियम 71क में आवश्यक संशोधन किया गया है। इसके तहत सभी निर्माण विभागों को निर्माण कार्यों में प्रयुक्त किये जाने वाले गौण खनिजों की कीमत जिसमें रायल्टी, डीएमएफ, पर्यावरण उपकर, अधोसंरचना उपकर तथा अवैधानिक स्रोत से प्राप्त खनिज का उपयोग न हो इस हेतु समझौता शुल्क के रूप सुरक्षार्थ मूल रायल्टी राशि अतिरिक्त काटकर रखे जाने प्रावधान किये गये हैं। इससे राज्य के सभी निर्माण विभागों में उपयोगित खनिजों की राशि कटौती की दर में एक रुपता होगी तथा खनिज विभाग से क्लीयरेंश प्राप्त करने पर उक्त काटी गई संपूर्ण राशि वापसी योग्य होगी अन्यथा निर्माण विभाग काटी गई राशि मय समझौता शुल्क को खनिज विभाग के मद में जमा करा देगा इसके पश्चात उस कार्य का कोई रायल्टी क्लियरेंश प्राप्त करने किसी ठेकेदार को कोई पत्र निर्माण विभाग जारी नहीं करेगा।
गौण खनिज से प्राप्त राजस्व राशि को नगरीय निकायों एवं त्रीस्तरीय पंचायतों में वितरण किये जाने के संदर्भ में:- गौण खनिज से प्राप्त राजस्व राशि को अब नगरीय निकायों ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों के साथ-साथ जिला पंचायतों में भी उक्त राशि का वितरण किया जा सकेगा। प्राप्त राशि का वितरण किस अनुपात में किया जायेगा के संबंध में पंचायत विभाग से प्राप्त प्रस्ताव अनुसार कार्यवाही की जायेगी।
खदानों के डेड रेंट में वृद्धि:-
छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 1996 के पश्चात् विगत 30 वर्षों से खदानों के डेड रेन्ट (अनिवार्य भाटक) की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया था। प्रदेश में संचालित गौण खनिज के खदानों की कुल संख्या 1900 से ज्यादा है। इनमें से लगभग 1300 के आसपास खदानें ही निरंतर संचालन की अवस्था में हैं तथा शेष खदानें शिथिल है। इन खदानों के संचालन न होने से राज्य में न सिर्फ खनिजों की आपूर्ति बाधित हो रही है वरन शासन को राजस्व भी प्राप्त नहीं हो रहा है। अत: डेड रेन्ट (अनिवार्य भाटक) की दरों में बढ़ोतरी से खदान संचालन हेतु इच्छुक पट्टेदार ही खनन पट्टा को कार्यशील रखेंगें अन्यथा शिथिल खदानों हेतु अधिक डेडरेंट जमा करायेंगें या खदान समर्पण करेंगे। खदान समर्पण स्थिति में उक्त क्षेत्र ऑक्शन/ नवीन स्वीकृति हेतु उपलब्ध होगा।
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