रायपुर, 24 जून (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ में सामने आए साड़ी घोटाला कांड के बाद राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए साड़ी की केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब यूनिफॉर्म के लिए निर्धारित राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि साड़ी खरीदी के लिए अब 100 प्रतिशत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) मॉडल लागू किया गया है। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को यूनिफॉर्म की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी, जिससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।
मंत्री ने कहा कि हाल ही में साड़ी खरीदी को लेकर सामने आए विवादों और सुझावों के गंभीर परीक्षण के बाद यह निर्णय लिया गया है। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार कॉटन, सिंथेटिक सहित अन्य कपड़ों का चयन कर सकेंगी।
हालांकि, प्रदेशभर में एकरूपता बनाए रखने के लिए साड़ी का रंग और डिजाइन विभागीय स्तर पर तय किया जाएगा। इसकी जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। साड़ी का अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से चर्चा के बाद तय किया जाएगा।
गौरतलब है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म दिए जाने का प्रावधान है। प्रत्येक यूनिफॉर्म के लिए अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित है, जो अब सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
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