0 भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई, किसान ने निजी जमीन लेने का किया विरोध
बिलासपुर, 26 जून (आरएनएस)। डोंगरगढ़ की बहुचर्चित परिक्रमा पथ परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने राजनांदगांव कलेक्टर को याचिकाकर्ता की शिकायत पर सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए उसका परीक्षण कर नियमानुसार निराकरण करने के आदेश दिए हैं।
मामला डोंगरगढ़ के बुधवारी पारा वार्ड क्रमांक-19 निवासी फहीम अख्तर द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि ग्राम छीरपानी स्थित उनकी कृषि भूमि को प्रस्तावित डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ निर्माण के लिए अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जबकि उन्होंने इसके लिए कोई सहमति नहीं दी थी।
याचिका में कहा गया है कि शासन की ओर से उनकी भूमि को कम कीमत पर खरीदने का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन वे अपनी जमीन बेचना नहीं चाहते और न ही किसी प्रकार का मुआवजा स्वीकार करना चाहते हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित परिक्रमा पथ के आसपास पर्याप्त शासकीय और राजस्व भूमि उपलब्ध है, जिससे सड़क का निर्माण किया जा सकता है। ऐसे में निजी भूमि का अधिग्रहण अनावश्यक और अनुचित है।
याचिकाकर्ता ने पहले इस संबंध में राजनांदगांव कलेक्टर को शिकायत भी सौंपी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
गौरतलब है कि करीब 55.45 करोड़ रुपये की डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ परियोजना शुरू से ही विवादों में रही है। परियोजना के तहत लगभग 8 किलोमीटर लंबा फोरलेन मार्ग बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसके लिए 46 किसानों की 6.386 हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहित करने और लगभग 6.33 करोड़ रुपये मुआवजा देने का प्रस्ताव है।
दूसरी ओर प्रभावित किसानों का आरोप है कि पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद निजी जमीन का चयन किया गया है। उनका कहना है कि उन्हें परियोजना का स्वीकृत रूट मैप, डीपीआर और भूमि चयन का तकनीकी आधार उपलब्ध नहीं कराया गया तथा उनकी आपत्तियों का भी संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस भी परियोजना का विरोध कर चुकी है। पार्टी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर परिक्रमा पथ परियोजना निरस्त करने, डोंगरगढ़ बाईपास निर्माण को प्राथमिकता देने, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। ऐसे में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले पर सभी की निगाहें कलेक्टर की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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