०समुदाय से चिन्हांकित पालक एवं बच्चे को योजना से जोड़कर बच्चों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कोंडागांव,26 जून (आरएनएस)। जिला कोंडागांव में बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए समुदाय आधारित फोस्टर केयर योजना के अंतर्गत पहला प्रकरण सफलतापूर्वक प्रारंभ किया गया है। इस पहल के अंतर्गत समुदाय से ही चिन्हांकित पालक परिवार एवं बच्चे को फोस्टर केयर योजना से जोड़ा गया, जो जिले में बाल हित संरक्षण, पारिवारिक वातावरण में देखभाल तथा बच्चों के समग्र पुनर्वास की दिशा में एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।यह प्रकरण न केवल जिले के लिए बल्कि समुदाय आधारित बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। फोस्टर केयर योजना का उद्देश्य ऐसे बच्चों को, जो किसी कारणवश अपने जैविक परिवार के साथ नहीं रह पा रहे हैं, सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि उनका शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक विकास बेहतर ढंग से हो सके। कोंडागांव जिले में इस योजना के अंतर्गत पहला प्रकरण समुदाय की सहभागिता से स्थापित होना इस बात का प्रमाण है कि अब समाज भी बाल संरक्षण की जिम्मेदारी में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बनाने में जिला बाल संरक्षण अधिकारी नरेन्द्र सोनी की विशेष भूमिका रही, जिनके मार्गदर्शन एवं सतत प्रयासों से समुदाय स्तर पर फोस्टर केयर की अवधारणा को मजबूत किया गया तथा पात्र बच्चों एवं इच्छुक पालक परिवारों की पहचान की प्रक्रिया को गति मिली। इसी प्रकार संरक्षण अधिकारी जयदीप एवं विभागीय स्टाफ द्वारा फील्ड स्तर पर समन्वय, दस्तावेजीकरण, परिवारों से संपर्क, परामर्श एवं अनुवर्ती कार्रवाई में उल्लेखनीय योगदान दिया गया।इस उपलब्धि में जिला बाल कल्याण समिति, कोंडागांव की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। समिति के अध्यक्ष त्रिलोक सार्वा के नेतृत्व में समिति के सदस्यों रामधर कोर्राम, इन्द्रदेव शर्मा, नेमी चंद देवागन तथा प्रतिमा मिश्रा ने बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए प्रकरण के परीक्षण, मार्गदर्शन, अनुमोदन एवं समन्वय में सक्रिय सहभागिता निभाई। समिति द्वारा संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और विधिक प्रावधानों के अनुरूप कार्य करते हुए इस प्रकरण को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।इसके साथ ही फोस्टर केयर ष्टश्व्रष्ट के अंतर्गत संभागीय कार्यक्रम अधिकारी रमेश कुमार दास की भूमिका भी अत्यंत उल्लेखनीय रही। उनके तकनीकी मार्गदर्शन, योजना संबंधी समझ, समुदाय-आधारित मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयास तथा जिला स्तर पर समन्वय ने इस प्रथम प्रकरण को मूर्त रूप देने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया। उनकी सहभागिता से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रक्रिया की स्पष्टता तथा हितग्राहियों तक पहुंच सुनिश्चित करने में सहायता मिली।जिला प्रशासन एवं बाल संरक्षण तंत्र द्वारा यह प्रयास इस विश्वास को और मजबूत करता है कि यदि समाज, प्रशासन और बाल संरक्षण संस्थाएं मिलकर कार्य करें तो ऐसे बच्चों के लिए बेहतर विकल्प तैयार किए जा सकते हैं जिन्हें संरक्षण, देखभाल और पारिवारिक सहयोग की आवश्यकता है। समुदाय आधारित फोस्टर केयर का यह पहला प्रकरण जिले में आने वाले समय में अन्य जरूरतमंद बच्चों के लिए भी आशा का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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