0-20 राज्यों ने 10 लाख करोड़ रुपये के आवंटन में से मात्र 58,636 करोड़ रुपये किए व्यय; केरल और हरियाणा सबसे आगे, झारखंड सबसे पीछे
नई दिल्ली, 28 जून। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में राज्यों के पूंजीगत व्यय की रफ्तार अपेक्षा से धीमी रही है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के मासिक लेखा-विश्लेषण के अनुसार, 20 राज्यों ने अपने वार्षिक पूंजीगत व्यय बजट का केवल 5.86 प्रतिशत ही खर्च किया है। इन राज्यों ने 10 लाख करोड़ रुपये के कुल बजटीय आवंटन में से मात्र 58,636 करोड़ रुपये का उपयोग किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह अनुपात 6.21 प्रतिशत था।
हालांकि वित्त वर्ष 2026 की तुलना में वित्त वर्ष 2027 में इन राज्यों का कुल पूंजीगत व्यय आवंटन 9.29 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये हो गया है, लेकिन वास्तविक खर्च में वृद्धि केवल लगभग 1.7 प्रतिशत ही दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि बजट बढऩे के बावजूद विकास परियोजनाओं पर व्यय अपेक्षाकृत धीमी गति से हो रहा है।
मई में खर्च की रफ्तार में आया सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल की सुस्ती के बाद मई माह में पूंजीगत व्यय में कुछ तेजी देखने को मिली। 20 राज्यों ने मई के दौरान सामूहिक रूप से लगभग 39,267 करोड़ रुपये खर्च किए, जो पिछले वर्ष मई में किए गए लगभग 35,864 करोड़ रुपये के व्यय से करीब 9.5 प्रतिशत अधिक है। इसके विपरीत अप्रैल में पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में वास्तविक रूप से लगभग 11 प्रतिशत कम रहा था।
केरल और हरियाणा ने किया बेहतर प्रदर्शन
पूंजीगत व्यय के उपयोग के मामले में केरल सबसे आगे रहा। राज्य ने पहले दो महीनों में अपने वार्षिक आवंटन का 29.35 प्रतिशत खर्च किया। इसके बाद हरियाणा ने 22.46 प्रतिशत व्यय कर दूसरा स्थान प्राप्त किया।
आंध्र प्रदेश ने 11.38 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश ने 10.25 प्रतिशत पूंजीगत व्यय कर दोहरे अंक का आंकड़ा पार किया। ये राज्य शुरुआती महीनों में विकास परियोजनाओं पर अपेक्षाकृत तेज खर्च करने वाले राज्यों में शामिल रहे।
झारखंड सबसे पीछे, कई बड़े राज्यों का प्रदर्शन भी कमजोर
रिपोर्ट के अनुसार झारखंड का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। राज्य का पूंजीगत व्यय 0.05 प्रतिशत के शुद्ध नकारात्मक स्तर पर बना रहा और वह दो महीनों के बाद भी संचयी नकारात्मक पूंजीगत व्यय दर्ज करने वाला एकमात्र राज्य रहा।
त्रिपुरा ने अपने आवंटन का केवल 0.34 प्रतिशत खर्च किया, जबकि मेघालय (1.55 प्रतिशत), उत्तराखंड (1.67 प्रतिशत) और महाराष्ट्र (1.85 प्रतिशत) भी सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहे।
देश के तीन बड़े राज्यों—उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक—का प्रदर्शन भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। उत्तर प्रदेश ने अपने लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक पूंजीगत व्यय बजट का केवल 2.98 प्रतिशत खर्च किया। तमिलनाडु ने 3.92 प्रतिशत और कर्नाटक ने 3.96 प्रतिशत व्यय किया।
हालांकि महाराष्ट्र और ओडिशा के लिए मई का महीना राहत लेकर आया। अप्रैल में दोनों राज्यों का पूंजीगत व्यय शुद्ध नकारात्मक था, लेकिन मई में महाराष्ट्र ने लगभग 2,530 करोड़ रुपये तथा ओडिशा ने लगभग 2,425 करोड़ रुपये खर्च कर स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया।
राजस्व व्यय की रफ्तार रही तेज
जहां पूंजीगत व्यय की गति धीमी रही, वहीं राजस्व व्यय अपेक्षाकृत तेज रहा। 20 राज्यों ने वित्त वर्ष 2027 में राजस्व व्यय के लिए निर्धारित 48.99 लाख करोड़ रुपये के बजट में से पहले दो महीनों में 5.70 लाख करोड़ रुपये, यानी 11.64 प्रतिशत राशि खर्च कर दी।
राजस्व व्यय के उपयोग में हिमाचल प्रदेश 16.42 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद आंध्र प्रदेश (15.86 प्रतिशत), तेलंगाना (14.28 प्रतिशत), केरल (14.21 प्रतिशत) और राजस्थान (13.21 प्रतिशत) का स्थान रहा।
वहीं झारखंड (5.54 प्रतिशत), बिहार (9.07 प्रतिशत), मेघालय (9.22 प्रतिशत) और महाराष्ट्र (9.36 प्रतिशत) राजस्व व्यय के मामले में सबसे धीमी गति से खर्च करने वाले राज्यों में शामिल रहे।
विकास परियोजनाओं पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि पूंजीगत व्यय में सुस्ती का असर आधारभूत ढांचा, सड़क, सिंचाई, ऊर्जा तथा अन्य विकास परियोजनाओं की प्रगति पर पड़ सकता है। हालांकि मई माह में खर्च की गति बढऩे से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले महीनों में राज्य सरकारें विकास कार्यों पर व्यय में तेजी लाएंगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
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