0-वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत किया; महंगाई और चालू खाता घाटा घटने की जताई उम्मीद
नई दिल्ली, 28 जून। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही बैंक ने महंगाई और चालू खाता घाटे के अनुमान में भी कमी की है।
‘अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भारत की बेहतर व्यापक आर्थिक संभावनाएं’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों को महत्वपूर्ण राहत मिलेगी। इससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ-साथ महंगाई पर भी नियंत्रण रहने की संभावना है।
तेल की कीमतों में गिरावट से बढ़ा भरोसा
गोल्डमैन सैक्स की वस्तु बाजार (कमोडिटी) अनुसंधान टीम ने कच्चे तेल के मूल्य अनुमान में संशोधन किया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में कच्चे तेल की औसत कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल के पूर्व अनुमान के स्थान पर अब 82 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना है। वहीं वर्ष 2027 में यह घटकर लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
तेल की कीमतों में इस संभावित गिरावट को देखते हुए बैंक ने भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर के अनुमान में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए इसे 6.8 प्रतिशत कर दिया है।
महंगाई पर भी मिलेगा नियंत्रण
रिपोर्ट में कहा गया है कि सस्ता कच्चा तेल पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम करेगा, जिससे परिवहन लागत और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसी आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 4.9 प्रतिशत कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा लागत कम होने से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और उद्योगों की उत्पादन लागत भी घटेगी।
सरकार को खाद सब्सिडी में मिलेगी राहत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे तेल के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में आई गिरावट से केंद्र सरकार के उर्वरक सब्सिडी पर होने वाले व्यय में कमी आएगी। इसके अलावा पेट्रो-रसायन आधारित उत्पादों की लागत घटने से विनिर्माण क्षेत्र में भी महंगाई का दबाव कम होगा।
चालू खाता घाटा घटने की संभावना
गोल्डमैन सैक्स ने भारत के बाह्य आर्थिक मोर्चे को भी मजबूत बताया है। रिपोर्ट के अनुसार सस्ते कच्चे तेल और विदेशी पूंजी प्रवाह में मजबूती के कारण वर्ष 2026 के लिए चालू खाता घाटे का अनुमान घटाकर सकल घरेलू उत्पाद का 1.1 प्रतिशत कर दिया गया है।
साथ ही भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) में सकल घरेलू उत्पाद के 0.7 प्रतिशत के अधिशेष (सरप्लस) की संभावना भी व्यक्त की गई है।
भारतीय अर्थव्यवस्था बनी हुई है मजबूत
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। सरकार की राजकोषीय नीतियों और ऊर्जा कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर सीमित रखने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जिसमें निवेश और सेवा क्षेत्र की मजबूत भूमिका रही।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महामारी के बाद वित्त वर्ष 2026-27 पहला ऐसा वर्ष हो सकता है, जब आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत से नीचे रहे। इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत उपभोग और निवेश के बल पर भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और भू-राजनीतिक परिस्थितियां स्थिर बनी रहती हैं, तो भारत की आर्थिक वृद्धि, महंगाई नियंत्रण और राजकोषीय संतुलन को आने वाले समय में और मजबूती मिल सकती है।
००
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

