0 न्यायाधीशों ने दिए सशक्त अनुसंधान और साक्ष्य संकलन के गुर
सूरजपुर, 28 जून (आरएनएस)। गंभीर अपराधों की विवेचना को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से शनिवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), एनडीपीएस एक्ट और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों की जांच, साक्ष्य संकलन और कानूनी प्रक्रियाओं पर पुलिस अधिकारियों एवं विवेचकों को प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती विनीता वार्नर ने किया। इस अवसर पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह, डीआईजी एवं एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर सहित न्यायिक अधिकारी, फोरेंसिक विशेषज्ञ और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती विनीता वार्नर ने कहा कि अपराधों की विवेचना में प्रक्रियात्मक त्रुटियों से बचना बेहद आवश्यक है। उन्होंने एफआईआर दर्ज होने से लेकर न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने तक की पूरी प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी देते हुए मजबूत साक्ष्य संकलन, डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण और नवीन कानूनों के प्रभावी पालन पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले मामलों में फोरेंसिक जांच अनिवार्य है और इसका गंभीरता से पालन किया जाना चाहिए।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह ने विशेष रूप से एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामलों में विवेचकों को कानूनी प्रावधानों और जांच प्रक्रिया की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में होने वाली छोटी-छोटी चूक का फायदा कई बार आरोपियों को मिल जाता है। इसलिए विवेचकों को चेकलिस्ट के आधार पर जांच करने की सलाह दी गई।
कार्यशाला में संयुक्त संचालक एफएसएल आर.के. पैंकरा, कुलदीप कुजूर और डॉ. रसलीन कौर ने वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, घटनास्थल के सूक्ष्म सुरागों की पहचान और फोरेंसिक जांच के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घटनास्थल से जुटाए गए छोटे-छोटे वैज्ञानिक साक्ष्य भी अपराधियों तक पहुंचने और न्यायालय में दोष सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डीआईजी एवं एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर ने विवेचकों से कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान का उपयोग बेहतर अनुसंधान में करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत विवेचना और पुख्ता साक्ष्यों के माध्यम से ही पीडि़तों को न्याय और अपराधियों को सजा सुनिश्चित की जा सकती है। साथ ही उन्होंने ई-साक्ष्य प्रणाली के प्रभावी उपयोग और तकनीक आधारित विवेचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी जोर दिया।
कार्यशाला में जिले के थाना-चौकी प्रभारियों सहित 145 विवेचकों ने भाग लिया और न्यायिक अधिकारियों तथा विशेषज्ञों से अपराध अनुसंधान से जुड़े विभिन्न प्रश्नों के समाधान प्राप्त किए। आयोजन का संचालन निरीक्षक जावेद मियादाद ने किया।
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