बिलासपुर 28 जून ( आरएनएस) रात के अंधेरे में बकरी कोठा की दीवार तोड़कर 19 बकरे-बकरियां पार करने वाले शातिर गिरोह का खेल आखिरकार खत्म हो गया। रतनपुर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई ने चोरी की पूरी साजिश का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार कर नकदी और वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो जब्त कर ली।
बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम चकराभाठा निवासी समन सिंह पैकरा ने 21 जून को रिपोर्ट दर्ज कराई कि 19 जून की रात वह रोज की तरह अपने 4 बकरे और 15 बकरियों को कोठा में बंद कर परिवार के साथ सो गया था। अगली सुबह उठने पर कोठा की ईंट की दीवार टूटी मिली और सभी 19 बकरे-बकरियां गायब थीं। शिकायत मिलते ही रतनपुर पुलिस ने अपराध दर्ज कर साइबर सेल के साथ संयुक्त जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे महिंद्रा स्कॉर्पियो से गांव-गांव घूमकर खेत समतलीकरण का काम मांगने के बहाने रेकी करते थे। जहां बकरा-बकरियां अधिक दिखाई देतीं, वहां रात में चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। आरोपियों ने 19 बकरे-बकरियों को 1.75 लाख रुपये में बेचने और उसमें से 25 हजार रुपये खर्च करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने उनके कब्जे से 1.50 लाख रुपये नकद तथा वारदात में प्रयुक्त महिंद्रा स्कॉर्पियो जब्त कर ली।
गिरफ्तार आरोपियों में बबलू खान पिता स्व. बदन खान (57 वर्ष), अमूर खान पिता नत्थू खान (66 वर्ष), अमीन खान पिता हकीम खान (41 वर्ष), हबीम खान पिता दरबार खान (35 वर्ष) तथा शाहरूख खान पिता मशीन खान (22 वर्ष), सभी निवासी उमरिया, थाना गोरा बाजार, जिला जबलपुर (मध्यप्रदेश) शामिल हैं। इनके अलावा मोहम्मद अछछन पिता मोहम्मद इलियास (33 वर्ष), निवासी रजकपुर वार्ड क्रमांक 40, थाना रजकपुर, जिला अमरोहा (उत्तरप्रदेश) को भी गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपी वर्तमान में कर्रा, थाना रतनपुर, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में रह रहे थे।

पूरी कार्रवाई थाना प्रभारी उपनिरीक्षक विष्णु यादव के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक बलदेव सिंह, सैय्यद अकबर अली, आकाश डोंगरे, देवानंद चंद्राकर, पवन ठाकुर, हरनारायण नेटी तथा साइबर सेल बिलासपुर की संयुक्त टीम ने की। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
फिलहाल, खेत समतलीकरण का ठेका लेने निकले गिरोह को अब जेल की चारदीवारी नापनी पड़ गई। चोरी का शॉर्टकट आखिर कानून के लंबे हाथों से नहीं बच सका।

