कोरबा 29 जून (आरएनएस)। ग्राम पंचायत करतली में एक बेटे ने पिता की स्मृति को जनसेवा का रूप देकर अनूठी मिशाल पेश की है। तत्कालीन सरपंच पति स्व. जयपाल सिंह कुसरो के आकस्मित निधन के बाद उनके पुत्र ज्योतिष कुसरो ने न सिर्फ पिता के ग्राम विकास के सपने को आगे बढाया, बल्कि गांव के तिराहे पर उनकी प्रतिमा स्थापित कर यादों को जीवंत कर दिया।
पाली जनपद अंतर्गत ग्राम करतली में विधायक मद से निर्मित प्रतिमा प्रेरणा का स्रोत बनी है, जहां पिता के गुजरने से बेटे के जिंदगी की राह ही बदल दी। स्व. जयपाल सिंह कुसरो करतली के लोकप्रिय व्यक्तित्व तथा तत्कालीन सरपंच पति थे। गत विधानसभा चुनाव के समय उनका आकस्मित निधन हो गया। उस समय उनके पुत्र ज्योतिष कुसरो बिलासपुर में रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। पिता को खोने का गम और ग्राम विकास का अधूरा सपना, ज्योतिष के लिए टर्निंग पॉइंट बन गया और उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ गांव लौटने का फैसला किया व पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सरपंच पद का प्रत्याशी बना। ज्योतिष की सादगी, पिता के प्रति सम्मान और गांव के लिए कुछ करने का जज्बा देख करतली की जनता ने उसे भारी मतों से विजयी बनाया। आज वे गांव के निर्वाचित सरपंच है तथा अपने दायित्व को पूरी निष्ठा से निभा रहा है। सडक, पानी, शिक्षा और स्वच्छता के मुद्दों पर उसकी सक्रियता गांव में दिख रही है। सरपंच बनने के बाद ज्योतिष ने पहला काम पिता की स्मृति को चिरस्थायी बनाने का किया। उसने गांव के मुख्य तिराहे पर स्व. जयपाल सिंह कुसरो की आदमकद प्रतिमा स्थापित करवाई। इस पुनीत कार्य मे क्षेत्रीय विधायक मद का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रतिमा के लोकार्पण पर पूरा गांव भावुक हो उठा। पीले गमछे से सजी पिता की यह प्रतिमा आज न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बन गई है।
गांव के बुजुर्ग कहते हैं, जब भी तिराहे से गुजरते है, लगता है जयपाल आज भी गांव देख रहे है। जयपाल ने गांव के लिए बहुत कुछ किया, अब उनका बेटा उससे भी आगे बढकर काम कर रहा है। वहीं युवा सरपंच ज्योतिष के लिए ये प्रतिमा हर दिन पिता के ग्राम विकास के अधूरे सपने की याद दिलाती है। सरपंच ज्योतिष कहते हैं, पिता जी हमेशा कहते थे कि सरपंची पद नही, सेवा है। उनका सपना था करतली को आदर्श गांव बनाना। उनकी अचानक गुजर जाने से वो सपना अधूरा रह गया। इंजीनियर बनकर शहर में नौकरी करना आसान था, लेकिन पिता के सपने को जीना मैने अपना धर्म समझा। आज जब गांव का कोई काम होता है तो लगता है पिता जी साथ खड़े हैं। ये प्रतिमा मुझे हर पल जिम्मेदारी से काम करने की ताकत देती है। करतली का ये वाक्या बताता है कि पिता का सच्चा सम्मान उनकी विरासत को आगे बढाने में है। ज्योतिष ने न सिर्फ गांव की जिम्मेदारी सम्हाली, बल्कि अपने पिता के मूल्यों, सेवा भाव और ग्राम विकास के विजन को आत्मसात किया। शहर की चकाचैंध छोड़ गांव की मिट्टी से जुडना और पिता के नाम को अमर करना, आज की पीढ़ी के लिए बड़ी सीख है।
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