अयोध्या 30 June (Rns) : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेज हो गई है। इसी क्रम में पुलिस ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय से करीब तीन घंटे तक पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान पुलिस ने प्रशासनिक फैसलों, चढ़ावे की व्यवस्था, कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और शिकायतों के निपटारे से जुड़े कई अहम सवाल पूछे। बताया जा रहा है कि कुछ सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण जरूरत पड़ने पर उनसे दोबारा पूछताछ की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब चंपत राय के बयान का मिलान अन्य गवाहों के बयान, दस्तावेजों और जांच में सामने आए तथ्यों से करेगी। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया है। जानकारी के मुताबिक, SIT जुलाई के पहले सप्ताह में अयोध्या पहुंचकर जांच पूरी करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है।
पूछताछ के दौरान चंपत राय ने पुलिस से कहा कि चढ़ावा चोरी मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उनका कहना था कि जैसे ही उन्हें मामले की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल कार्रवाई शुरू कराई, संदिग्धों को पकड़वाया और पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने कहा, “मैंने ही SIT को शिकायत दी थी, जिसके आधार पर केस दर्ज हुआ। हालांकि, यह मेरी गलती रही कि शिकायत दर्ज कराने में देरी हुई और हम पहले आंतरिक जांच करते रहे।”
चंपत राय ने यह भी स्वीकार किया कि चढ़ावे की व्यवस्था में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इसकी जिम्मेदारी उनकी थी। टिन्नू यादव से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से मंदिर व्यवस्था से जुड़ा था और उससे इस तरह की हरकत की उम्मीद नहीं थी।
पुलिस ने नियुक्तियों को लेकर भी सवाल किए। रिश्तेदारों या परिचितों को काम दिए जाने के संबंध में चंपत राय ने कहा कि जरूरतमंद और गरीब लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से नियुक्तियां की गई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्तियों का फैसला केवल उनका नहीं, बल्कि ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की सहमति से होता था।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में चंपत राय ने अनिल मिश्रा और गोपाल राव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इनकी ओर से भी लोगों की सिफारिशें आती थीं और अधिकांश नियुक्तियां जरूरतमंदों की मदद के उद्देश्य से की गई थीं। हालांकि, किसी के इस तरह की कथित गड़बड़ी में शामिल होने की उम्मीद नहीं थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा समेत ट्रस्ट के कई सदस्यों की वित्तीय जानकारी जुटा रही है। उनके बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, जांचकर्ताओं के बारे में यह दावा कि चंपत राय “अच्छे प्रशासक नहीं हैं” और उनकी ओर से लापरवाही हुई, आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या पुलिस ने जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ की अनुमति के लिए अदालत में अर्जी दी है, लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिली है। अनुमति मिलने के बाद पुलिस टिन्नू यादव, अविनाश शुक्ला, लवकुश समेत सभी आठ आरोपियों से जेल में पूछताछ कर सकती है।
इस बीच जांच में एक और पहलू सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, SBI अपने आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाना चाहता था, लेकिन ट्रस्ट के हस्तक्षेप के बाद ऐसा नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि उस समय तक चढ़ावा चोरी का मामला सामने नहीं आया था। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए ट्रस्ट की ओर से हस्तक्षेप क्यों किया गया और इसके पीछे कोई विशेष कारण था या नहीं।
फिलहाल जांच एजेंसियां चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था, कर्मचारियों की तैनाती, बैंक कर्मियों की भूमिका और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक फैसलों की पूरी श्रृंखला को जोड़कर मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

