नई दिल्ली,30 जून। राजधानी दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से सरकार द्वारा घोषित नई विद्युत वाहन (ईवी) नीति का असर शेयर बाजार में भी साफ दिखाई दिया। नीति की घोषणा के बाद ऑटोमोबाइल क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आयशर मोटर्स के शेयरों में जोरदार बिकवाली हुई। दोपहर के कारोबार में यह शेयर राष्ट्रीय शेयर बाजार (एनएसई) के निफ्टी सूचकांक में सबसे अधिक गिरावट दर्ज करने वाला शेयर रहा।
दोपहर करीब 12 बजे आयशर मोटर्स का शेयर लगभग 290 रुपये (3.91 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 7,138 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। दिन के दौरान इसने 7,392.50 रुपये का उच्चतम और 6,942.50 रुपये का न्यूनतम स्तर छुआ। कंपनी का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 8,230 रुपये तथा न्यूनतम स्तर 5,353 रुपये रहा है।
वर्ष 2028 से पेट्रोल और सीएनजी दोपहिया वाहनों का पंजीकरण बंद
आयशर मोटर्स के शेयरों में गिरावट का प्रमुख कारण दिल्ली सरकार की प्रस्तावित नई विद्युत वाहन नीति है। इस नीति के अनुसार 1 जनवरी 2028 से राजधानी में पेट्रोल तथा संपीडि़त प्राकृतिक गैस (सीएनजी) से चलने वाले सभी नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद 1 अप्रैल 2028 से केवल विद्युत दोपहिया वाहनों का ही पंजीकरण होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा के बाद किसी प्रकार की अतिरिक्त मोहलत नहीं दी जाएगी और संकर (हाइब्रिड) वाहनों को भी कोई विशेष छूट नहीं मिलेगी।
भारतीय दोपहिया वाहन बाजार में दिल्ली की हिस्सेदारी लगभग तीन प्रतिशत है। ऐसे में यह फैसला वाहन कंपनियों के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2025-26 में आयशर मोटर्स ने राजस्व, परिचालन लाभ (ईबीआईटीडीए) और शुद्ध लाभ के स्तर पर रिकॉर्ड प्रदर्शन किया था, लेकिन नई नीति ने कंपनी की भविष्य की रणनीति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
रॉयल एनफील्ड पर बढ़ा विद्युत वाहनों की श्रृंखला बढ़ाने का दबाव
आयशर मोटर्स के लोकप्रिय ब्रांड रॉयल एनफील्ड के लिए यह नीति बड़ी चुनौती मानी जा रही है। वर्तमान में कंपनी के पास केवल एक विद्युत मोटरसाइकिल मॉडल उपलब्ध है और दिल्ली के विद्युत वाहन बाजार में उसकी उपस्थिति सीमित है।
इसके विपरीत पारंपरिक पेट्रोल मोटरसाइकिल बाजार में रॉयल एनफील्ड की मजबूत पकड़ है। भारतीय ऑटोमोबाइल विनिर्माता सोसायटी (सियाम) के अनुसार दिल्ली के दोपहिया बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी लगभग 3.3 प्रतिशत है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जिन कंपनियों के पास मजबूत विद्युत वाहन उत्पाद श्रृंखला नहीं है, उन्हें तेजी से नए मॉडल बाजार में उतारने होंगे, अन्यथा दिल्ली जैसे बड़े बाजार में उनकी हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। निर्धारित समय-सीमा में अब दो वर्ष से भी कम समय बचा है, जिससे रॉयल एनफील्ड पर विद्युत वाहन पोर्टफोलियो का विस्तार करने का दबाव बढ़ गया है।
सिटी गैस वितरण कंपनियों पर भी पड़ेगा प्रभाव
नई नीति का असर केवल वाहन निर्माता कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरी गैस वितरण (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) क्षेत्र पर भी इसका प्रभाव पडऩे की संभावना है।
ब्रोकरेज कंपनी नोमूरा की रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में दोपहिया वाहनों के विद्युत आधारित होने से इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) के संपीडि़त प्राकृतिक गैस (सीएनजी) कारोबार पर दीर्घकाल में प्रतिकूल असर पड़ सकता है। सीएनजी की मांग और बिक्री में कमी आने की आशंका जताई गई है।
हालांकि महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) पर इस नीति का सीधा प्रभाव नहीं माना जा रहा है। वहीं गुजरात गैस पर भी इसका असर अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है, क्योंकि भविष्य में घरेलू तथा औद्योगिक पाइप प्राकृतिक गैस (पीएनजी) की मांग इस क्षेत्र की वृद्धि का प्रमुख आधार बनेगी।
बाजार की नजर आगे की रणनीति पर
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली की नई विद्युत वाहन नीति देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है। यदि अन्य राज्य भी इसी प्रकार के कदम उठाते हैं तो पारंपरिक ईंधन आधारित वाहन निर्माताओं और गैस वितरण कंपनियों को अपनी कारोबारी रणनीति में बड़े बदलाव करने होंगे। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर है कि आयशर मोटर्स और अन्य वाहन निर्माता कंपनियां विद्युत वाहन क्षेत्र में अपनी मौजूदगी कितनी तेजी से मजबूत करती हैं।
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