0-घर-घर जाकर होगा सत्यापन, जानिए पूरी प्रक्रिया और किन दस्तावेजों की होगी आवश्यकता
नई दिल्ली,01 जुलाई(आरएनएस)। निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, झारखंड और मेघालय में मंगलवार से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अभियान के तहत बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे, ताकि मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाया जा सके और केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम ही सूची में शामिल रहें।
निर्वाचन आयोग के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य नए पात्र मतदाताओं को जोडऩा, मृत अथवा स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाताओं के नाम हटाना, दोहराए गए नामों को समाप्त करना तथा मतदाता विवरण में मौजूद त्रुटियों को सुधारना है। पांचों राज्यों में इस प्रक्रिया से लगभग 19.79 करोड़ मतदाता जुड़े हुए हैं।
ऐसे चलेगी पूरी प्रक्रिया
अभियान के पहले चरण में बूथ स्तरीय अधिकारी प्रत्येक घर पर जाकर पहले से भरा हुआ गणना प्रपत्र (एन्यूमरेशन फॉर्म) दो प्रतियों में उपलब्ध कराएंगे। इस प्रपत्र में मतदाता की वर्तमान जानकारी, फोटो, त्वरित प्रतिक्रिया संकेतांक (क्यूआर कोड), बूथ स्तरीय अधिकारी का नाम तथा मोबाइल नंबर अंकित रहेगा।
मतदाता को प्रपत्र में दर्ज जानकारी का सावधानीपूर्वक मिलान करना होगा। यदि किसी प्रकार की त्रुटि हो तो उसका उल्लेख करना होगा। हस्ताक्षर करने के बाद एक प्रति बूथ स्तरीय अधिकारी को वापस देनी होगी, जबकि दूसरी प्रति मतदाता अपने पास सुरक्षित रखेगा।
घर बंद होने पर भी मिलेगा अवसर
यदि सत्यापन के समय घर बंद मिलता है तो बूथ स्तरीय अधिकारी प्रपत्र दरवाजे पर छोड़ देगा और उसे लेने के लिए कम से कम तीन बार पुन: आएगा। यदि तीनों बार संपर्क नहीं हो पाता है तो मतदाता प्रारूप मतदाता सूची जारी होने के बाद दावा या आपत्ति दर्ज कर अपनी जानकारी संशोधित करा सकता है अथवा नया नाम जुड़वा सकता है।
ऑनलाइन भी भर सकेंगे प्रपत्र
मतदाता आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर भी गणना प्रपत्र ऑनलाइन भर सकते हैं। इसके लिए पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से संबंधित जानकारी देनी होगी। मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) संख्या, नाम अथवा मतदान केंद्र की सहायता से पुरानी मतदाता सूची में अपना विवरण देखा जा सकता है।
दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक के लिए वर्ष 2002 की मतदाता सूची, झारखंड के लिए वर्ष 2003 तथा मेघालय के लिए वर्ष 2005 की मतदाता सूची को आधार माना जाएगा।
माता-पिता या दादा-दादी का विवरण देना होगा
यदि किसी मतदाता का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नहीं है अथवा उसका जन्म वर्ष 1987 के बाद हुआ है, तो उसे अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम देना होगा, जिनका नाम उस समय की मतदाता सूची में दर्ज था।
विवाहित महिलाओं को यदि पिछली सूची में उनका नाम दर्ज नहीं है, तो ससुराल पक्ष के बजाय अपने माता-पिता अथवा पैतृक परिवार का विवरण देना होगा। यदि माता-पिता का नाम भी सूची में नहीं है, तब भी उनका विवरण प्रपत्र में अंकित किया जा सकता है।
इन दस्तावेजों में कोई भी एक होगा मान्य
यदि मतदाता अथवा उसके माता-पिता का नाम पुरानी मतदाता सूची में उपलब्ध नहीं है, तो पहचान और पात्रता के लिए निम्न दस्तावेज प्रस्तुत किए जा सकते हैं—
* जन्म प्रमाण पत्र
* पासपोर्ट
* कक्षा दसवीं अथवा अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र
* निवास प्रमाण पत्र
* जाति प्रमाण पत्र
* सरकारी अथवा सार्वजनिक उपक्रम का पहचान पत्र
* पेंशन कार्ड
* राज्य सरकार अथवा स्थानीय निकाय द्वारा जारी पारिवारिक रजिस्टर
* भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र
* वन अधिकार प्रमाण पत्र
* राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का प्रमाण
* आधार कार्ड
किरायेदार भी हैं पात्र
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से किराये पर किसी पते पर रह रहा है, तो वह भी मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने का पात्र होगा। आवश्यकता पडऩे पर बूथ स्तरीय अधिकारी निवास का प्रमाण मांग सकते हैं।
अपार्टमेंट और आवासीय सोसायटी में रहने वाले मतदाताओं के घर भी अधिकारी पहुंचेंगे। परिवार का कोई एक सदस्य अन्य सदस्यों के हस्ताक्षरित एवं सही तरीके से भरे गए प्रपत्र भी जमा करा सकता है।
महत्वपूर्ण तिथियां
* 30 जून से 29 जुलाई – घर-घर जाकर सत्यापन और गणना प्रपत्र वितरण।
* 5 अगस्त – प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन।
* 5 अगस्त से 4 सितंबर – दावा एवं आपत्ति दर्ज कराने की अवधि।
* 3 अक्टूबर – सभी दावों और आपत्तियों का अंतिम निपटारा।
* 7 अक्टूबर – अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन।
निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे सत्यापन अभियान में सहयोग करें, समय पर प्रपत्र भरें तथा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराकर मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने में भागीदारी निभाएं।
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