दिल्ली 02 Jully । प्रोविडेंट फंड में बड़ा बदलाव किया गया है। एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने कहा है कि कानूनी वेतन सीमा (जो अभी 15,000 रुपये प्रति माह है) तक 12% का योगदान अनिवार्य है।
ईपीएफओ ने आगे कहा कि इससे ज्यादा कोई भी योगदान स्वैच्छिक (अपनी मर्जी से किया गया) माना जाएगा। भले ही आपकी बेसिक सैलरी 1 लाख रुपये प्रति माह हो, आपके पीएफ योगदान के तौर पर 1,800 रुपये काटे जाएंगे। साथ ही एम्प्लॉयर (नियोक्ता) भी उतना ही योगदान देगा। हालांकि, आपके पास बची हुई सैलरी में से कुछ हिस्सा रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए जमा करने का विकल्प भी होगा।
एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स स्कीम, 2026 के प्रावधानों के अनुसार, “कोई कर्मचारी कानूनी वेतन सीमा से ज्यादा वेतन पर कानूनी दर या उससे ज्यादा किसी भी दर पर स्वैच्छिक आधार पर अतिरिक्त योगदान देने का विकल्प चुन सकता है।”
एम्प्लॉयर के पास इन अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदानों के बराबर योगदान देने का विकल्प है। यह कोई मजबूरी नहीं है। कर्मचारी और एम्प्लॉयर दोनों ही किसी भी समय ऐसे अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान को कम या बंद कर सकते हैं।
पैसे निकालने की प्रक्रिया को बनाया आसान
ईपीएफओ ने पैसे निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाया है और कैटेगरीज को 13 से घटाकर सिर्फ 3 कर दिया है। एक अधिकारी ने बताया, “इस स्कीम में जो लचीलापन लाया गया है, उसका मकसद योगदान देने वाले सदस्यों को उनकी रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए ज्यादा आजादी देना है

