धमतरी 2 जुलाई (आरएनएस) जिस घर में बेटे की मौत पर मातम था, वहीं हत्या का सबसे बड़ा राज भी छिपा था। धमतरी पुलिस ने महज 48 घंटे में एक ऐसे अंधे कत्ल का पर्दाफाश किया है, जिसे आत्महत्या साबित करने की पूरी साजिश रची गई थी। वैज्ञानिक जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों ने सच सामने ला दिया। पुलिस ने मृतक की माँ कमला बाई साहू (60) और भाई नरेश साहू (22) को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
घटना 29 जून 2026 को ग्राम गोजी, चौकी बिरेझर, थाना कुरूद** क्षेत्र की है, जहां 23 वर्षीय नरसिंग साहू का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला था। शुरुआती नजर में मामला आत्महत्या का लग रहा था, लेकिन पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार के निर्देश पर चौकी बिरेझर पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए, गवाहों से पूछताछ हुई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का सूक्ष्म विश्लेषण कराया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि युवक की मौत हाथ से गला दबाने और रस्सी से गला कसकर श्वास अवरुद्ध करने से हुई है। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी।
लगातार पूछताछ और तकनीकी व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मृतक के भाई नरेश साहू पिता दौवाराम साहू (22 वर्ष), निवासी ग्राम गोजी तथा माँ कमला बाई साहू पति दौवाराम साहू (60 वर्ष), निवासी ग्राम गोजी, चौकी बिरेझर, जिला धमतरी से कड़ाई से पूछताछ की गई। दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपियों ने बताया कि नरसिंग शराब पीने के लिए पैसों की मांग कर रहा था। पैसे नहीं मिलने पर विवाद और मारपीट शुरू हो गई। गुस्से में पहले उसका हाथ से गला दबाया गया, फिर नारियल की रस्सी से गला कसकर उसकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं, उसके जीवित होने की आशंका में उसे कीटनाशक दवा भी पिला दी गई।
हत्या के बाद दोनों आरोपियों ने पुलिस और परिजनों को गुमराह करने के लिए शव को फंदे पर लटका दिया, ताकि मामला आत्महत्या लगे। लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना के आगे यह साजिश ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर थाना कुरूद में अपराध क्रमांक 199/2026 के तहत धारा 103(1), 238, 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। न्यायालय में पेश करने के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
बहरहाल, यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अपराध चाहे कितनी भी चालाकी से छिपाया जाए, वैज्ञानिक जांच और साक्ष्यों के सामने सच देर-सबेर बाहर आ ही जाता है।


