लखनऊ,(आरएनएस ) 2 जुलाई 2026। राजधानी लखनऊ में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग में संचालित एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। संयुक्त कार्रवाई में कुल 119 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 103 लैपटॉप, 68 एप्पल आईफोन, 116 हेडफोन, 109 मोबाइल फोन और बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार यह गिरोह मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम देता था।यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन, संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार के पर्यवेक्षण तथा पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल कुमार यादव के मार्गदर्शन में की गई। अभियान का नेतृत्व अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव (आईपीएस) ने किया। साइबर क्राइम सेल और थाना साइबर क्राइम पुलिस की संयुक्त टीम ने 1 जुलाई की देर शाम समिट बिल्डिंग पर छापा मारकर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया।पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह आधुनिक इंटरनेट आधारित कॉलिंग तकनीक, वीओआईपी सिस्टम और प्रतिबंधित आईबीम डायलर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता था। आरोपी स्वयं को अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, पेपाल, नेटफ्लिक्स और फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों का अधिकृत प्रतिनिधि या कस्टमर सपोर्ट अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे। उन्हें बताया जाता था कि उनके बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट या पहचान से जुड़ी गंभीर समस्या सामने आई है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।जब पीडि़त डर जाता था, तब कॉल को दूसरे स्तर पर स्थानांतरित कर आरोपी स्वयं को एफबीआई, फेडरल ट्रेड कमीशन (स्नञ्जष्ट), यूएस मार्शल सर्विस, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और अमेरिकी अदालतों का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी और जांच का भय दिखाते थे। भरोसा दिलाने के लिए फर्जी कोर्ट ऑर्डर, इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट, आईडेंटिटी थेफ्ट रिपोर्ट और एनडीए जैसे नकली दस्तावेज ई-मेल से भेजे जाते थे, जो देखने में असली सरकारी दस्तावेज जैसे लगते थे।जांच में पता चला कि पूरा कॉल सेंटर एक कॉर्पोरेट कंपनी की तरह संचालित हो रहा था। इसमें अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं। पहली टीम फर्जी संदेश भेजकर लोगों को डराती थी कि उनके खाते का इस्तेमाल बाल यौन शोषण सामग्री, मादक पदार्थ तस्करी या आतंकी गतिविधियों में हुआ है। दूसरी टीम कॉल रिसीव कर विश्वास जीतती थी। तीसरी टीम बैंक खातों और धनराशि की जानकारी जुटाती थी और चौथी टीम पीडि़तों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी या नकदी के रूप में पैसा वसूलती थी।पुलिस के अनुसार गिरोह विभिन्न राज्यों से बीपीओ और इंटरनेशनल कॉलिंग का अनुभव रखने वाले युवाओं की भर्ती करता था। उन्हें फर्जी कंपनी “सोलारिस सॉल्यूशंस” के नाम पर रहने की सुविधा दी जाती थी, लेकिन कोई वैधानिक नियुक्ति पत्र नहीं दिया जाता था। ठगी की रकम सीधे बैंक खातों में लेने के बजाय गिफ्ट कार्ड, डिजिटल वाउचर और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से प्राप्त की जाती थी, ताकि धन के स्रोत और अंतिम लाभार्थी को छिपाया जा सके।छापे के दौरान पुलिस ने 103 लैपटॉप, 68 एप्पल आईफोन, 109 मोबाइल फोन, 116 हेडफोन, 111 लैपटॉप चार्जर, 8 वाई-फाई राउटर, एक बायोमेट्रिक मशीन तथा बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा, कॉलिंग स्क्रिप्ट, विदेशी नागरिकों का डेटा और फर्जी सरकारी दस्तावेज बरामद किए हैं।इस मामले में थाना साइबर क्राइम लखनऊ में बीएनएस, आईटी एक्ट और टेलीकॉम एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, तकनीकी सहयोगियों, सर्वर, ई-मेल खातों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई देश में चल रहे संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है।
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