नई दिल्ली,02 जुलाई(आरएनएस)। राजनीति के अपराधीकरण को रोकने और संवैधानिक नैतिकता को मजबूत करने के उद्देश्य से लाए गए 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) अपनी रिपोर्ट 17 जुलाई तक लोकसभा स्पीकर को सौंप देगी, यानी मानसून सत्र से ठीक पहले. जेपीसी की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बताया कि रिपोर्ट 17 जुलाई तक सौंप दी जाएगी. उन्होंने कहा, हमने देश के सभी वर्गों से प्रतिनिधित्व मांगे थे. किसी ने भी इस कदम के इरादे पर सवाल नहीं उठाया है. इसका मकसद साफ है- राजनीति का अपराधीकरण रोकना और संवैधानिक नैतिकता को बरकरार रखना.
सूत्रों के मुताबिक, जेपीसी के सदस्यों ने अब तक 42 संस्थानों- लॉ कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कई एनजीओ से मिलकर सुझाव लिए हैं. राज्य सरकारों से भी लिखित प्रतिनिधित्व मांगे गए. समिति के सदस्यों ने 11 एनडीए शासित राज्यों का दौरा किया और कई अन्य राज्यों से लिखित सुझाव प्राप्त किए. दिल्ली और महाराष्ट्र ने कोई आपत्ति नहीं जताई. बुधवार को आंध्र प्रदेश ने दो मामूली संशोधनों के सुझाव भेजे. सरकार मानसून सत्र में विधेयक पेश करेगी या नहीं, अभी साफ नहीं है.
मगर सूत्रों की मानें तो यह अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार आगामी मानसून सत्र में इस विधेयक को सदन में पेश करेगी या नहीं. विधेयक को पास होने के लिए सदन में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है. हालांकि आप, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव गुट) जैसे क्षेत्रीय दलों में टूट के बावजूद एनडीए के पास अभी पूर्ण बहुमत नहीं है.
संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 के मुताबिक, अगर कोई मंत्री किसी ऐसे अपराध में आरोपी है जिसमें 5 साल से अधिक की सजा का प्रावधान है या वह 30 दिनों से अधिक समय तक जेल में बंद रहा, तो उसे पद से हटाया जा सकेगा. हटाने का फैसला राष्ट्रपति या राज्यपाल प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री की सलाह पर कर सकेंगे या फिर 31वें दिन स्वत: हट जाएंगे.
नवंबर 2025 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सदन में पेश किए जाने पर विपक्षी सदस्यों ने इस विधेयक पर जमकर हंगामा किया था. इसके बाद दिसंबर में 31 सदस्यीय जेपीसी का गठन किया गया, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया.
जेपीसी में गैर-एनडीए के सिर्फ चार सदस्य हैं- एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले, एसएडी की हरसिमरत कौर बादल और सुधा मूर्ति. हरसिमरत कौर बादल ने पहली बैठक के बाद जेपीसी से इस्तीफा दे दिया था.
जेपीसी की रिपोर्ट अब अंतिम चरण में है और रिपोर्ट तैयार करने के बाद सरकार को सौंपेगी. यह विधेयक अगर पास हो गया तो देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
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