विधानसभा अध्यक्ष बोले,साइबर ठगी पर बने कठोर कानून; जनप्रतिनिधियों ने डिजिटल सुरक्षा और एआई को शिक्षा का हिस्सा बनाने की उठाई मांग।
रांच 3 जुलाई (आरएनएस)। झारखंड विधानसभा अध्यक्ष के मार्गदर्शन में बाल कल्याण संघ एवं द एशिया फाउंडेशन, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में झारखंड विधानसभा सभागार में साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल सुरक्षा और ऐ आई : वर्तमान परिदृश्य और चुनौतियां विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों आमजन को साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप, ्रढ्ढ के बढ़ते प्रभाव, डिजिटल सुरक्षा के उपायों तथा नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के प्रति संवेदनशील बनाना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबिन्द्र नाथ महतो ने कहा कि आज एआई का उपयोग मेडिकल, शिक्षा, प्रशासन, उद्योग सहित लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है। यह तकनीक मानव जीवन को सरल और प्रभावी बना रही है, लेकिन इसका दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि मोबाइल और डिजिटल तकनीक से लोगों को अनेक सुविधाएं मिली हैं, लेकिन इसके दुरुपयोग से साइबर अपराध, फर्जीवाड़ा और डिजिटल धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं।
उन्होंने कहा कि साइबर ठगी की एक घटना किसी परिवार की वर्षों की मेहनत की कमाई को पलभर में समाप्त कर सकती है। ऐसे परिवारों की पीड़ा वही समझ सकता है, जिसने इसे झेला हो। उन्होंने कहा कि सरकार ने साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन अब और अधिक प्रभावी एवं कठोर नीति बनाने की आवश्यकता है, ताकि साइबर अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिल सके और समाज में कानून का भय कायम हो।
हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि नई पीढ़ी का जीवन मोबाइल और इंटरनेट से गहराई से जुड़ चुका है। तकनीक का सही उपयोग विकास का माध्यम है, लेकिन इसके दुष्परिणामों से बचाने के लिए स्कूल स्तर से ही साइबर सुरक्षा और एआई की शिक्षा देना आवश्यक है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि विधानसभा सत्र के दौरान सभी माननीय विधायकों के लिए भी साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल सुरक्षा पर नियमित प्रशिक्षण आयोजित किया जाए। राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि एआई का दुरुपयोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। चुनाव के दौरान फर्जी वीडियो, मॉफ्र्ड तस्वीरों और भ्रामक डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल कर जनप्रतिनिधियों की छवि प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के मोबाइल नंबर, ई-मेल और अन्य जानकारियां सार्वजनिक होने के कारण वे साइबर अपराधियों के निशाने पर रहते हैं। उन्होंने सरकार से साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में और मजबूत कानून एवं प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई। रांची विधायक सी.पी. सिंह ने कहा कि तकनीक स्वयं कभी गलत नहीं होती, उसका दुरुपयोग करने वाली मानसिकता समस्या पैदा करती है। उन्होंने कहा कि लालच और बिना मेहनत के लाभ पाने की प्रवृत्ति साइबर अपराधों को बढ़ावा देती है। लोगों को सतर्क रहने, किसी भी फर्जी ऑफर या संदिग्ध लिंक पर भरोसा नहीं करने और तकनीक का समझदारी से उपयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक से डरने की नहीं, बल्कि उसे समझकर उसका सुरक्षित उपयोग करने की जरूरत है। बाल कल्याण संघ के संस्थापक संजय मिश्रा ने कहा कि आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और कई मोबाइल एप्लिकेशन उपयोगकर्ताओं से आवश्यकता से अधिक जानकारी एकत्र कर रहे हैं। कई साधारण ऐप भी कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन और अन्य संवेदनशील अनुमतियां मांगते हैं, जिनकी वास्तव में आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि लोग ऐप इंस्टॉल करते समय उनकी अनुमतियों की जांच करें तथा अनावश्यक ऐप को मोबाइल से हटाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है। द एशिया फाउंडेशन, नई दिल्ली की नंदिता बरुआ ने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने बताया कि इस पहल की शुरुआत भारत सरकार के संसद सदस्यों के साथ की गई थी। इसके बाद बिहार में कार्यक्रम आयोजित किए गए और अब झारखंड में इसकी शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी यह कार्यक्रम निरंतर जारी रहेगा ताकि अधिक से अधिक जनप्रतिनिधि और नागरिक साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक हो सकें। हमें कई स्तर पर अपने डिजिटल जानकारी को टू सेटअप भेरिफिकेशन के साथ कोई भी नई पासवर्ड इस्तेमाल हम बहुत मजबूती से करें ऐसा नहीं कि वेंडर द्वारा दिया गया पासवर्ड ही हम प्रयोग करते रहें । साइबर पीस फाउंडेशन के तकनीकी प्रमुख केप्टन जोशी ने साइबर अपराधों के नए तरीकों, एआई आधारित धोखाधड़ी, डीपफेक, फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी वेबसाइट, ओटीपी फ्रॉड और मोबाइल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, ऐप परमिशन की नियमित जांच, संदिग्ध लिंक से बचने तथा सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतने के व्यावहारिक उपाय भी बताए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विधायक, जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं आमंत्रित प्रतिभागी उपस्थित रहे।
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