0-मेटा, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और सिग्नल से जवाब तलब, सुरक्षा और जवाबदेही पर बढ़ा जोर
नई दिल्ली,06 जुलाई(आरएनएस)। केंद्र सरकार ने हाल के सप्ताहों में कई प्रमुख टेक कंपनियों के खिलाफ अलग-अलग मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, पारदर्शिता और यूजर्स की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता स्पष्ट कर दी है। पिछले तीन सप्ताह के दौरान व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म को विभिन्न मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं या आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि डिजिटल सेवाओं का दुरुपयोग रोकना और ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
सरकार के अनुसार कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध फीचर्स का इस्तेमाल साइबर अपराध, फर्जी पहचान, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इसी संदर्भ में व्हाट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार का मानना है कि यदि ऐसे फीचर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना लागू किए जाते हैं तो इनका दुरुपयोग बढ़ सकता है। वहीं टेलीग्राम और सिग्नल से भी उनके कुछ फीचर्स और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित जानकारी मांगी गई है।
सरकार का स्पष्ट कहना है कि केवल यूजर्स ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के डिजाइन, तकनीकी संरचना और सुरक्षा व्यवस्था भी जवाबदेह होनी चाहिए। यदि किसी प्लेटफॉर्म की तकनीकी व्यवस्था अपराध या धोखाधड़ी को बढ़ावा देने में सहायक बनती है तो कंपनियों को उसके लिए आवश्यक सुधार करने होंगे।
इस बीच इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कथित विज्ञापनों के प्रसार को लेकर भी सरकार ने मेटा से जवाब मांगा है। सरकार ने इस मामले को गंभीर बताते हुए पूछा है कि ऐसे कंटेंट को रोकने और हटाने के लिए कंपनी ने क्या कदम उठाए हैं। इससे पहले टेलीग्राम को भी परीक्षा संबंधी सामग्री के कथित लीक और अन्य विवादों को लेकर जांच और कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।
सरकार का कहना है कि यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत, भ्रामक या नुकसान पहुंचाने वाला कंटेंट प्रसारित होता है तो संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी केवल उसे हटाने तक सीमित नहीं हो सकती। समय पर कार्रवाई, जांच एजेंसियों के साथ सहयोग और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था भी कंपनियों की जिम्मेदारी का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए अधिक स्पष्ट, कड़े और व्यापक नियामकीय ढांचे की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में टेक कंपनियों को अपने सिस्टम से जुड़े संभावित जोखिमों का नियमित आकलन करना पड़ सकता है और सुरक्षा मानकों का पालन पहले से अधिक सख्ती से करना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार इन कदमों का उद्देश्य नवाचार को रोकना नहीं, बल्कि डिजिटल इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, वहीं यूजर्स की निजता और सुरक्षा भी बेहतर हो सकेगी।
केंद्र सरकार के हालिया कदम यह संकेत देते हैं कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता के मानक लगातार सख्त होते जा रहे हैं। आने वाले समय में बड़ी टेक कंपनियों को भारतीय कानूनों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपनी नीतियों एवं तकनीकी प्रणालियों में आवश्यक बदलाव करने पड़ सकते हैं।
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