अंबिकापुर,06 जुलाई (आरएनएस)। झारखंड के चर्चित वासेपुर दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पा चुका फरार आरोपी पिछले करीब 13 वर्षों से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पहचान बदलकर रह रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद आरोपी को पकडऩे पहुंची झारखंड पुलिस को वह चकमा देकर फरार हो गया। अब झारखंड और सरगुजा पुलिस उसकी तलाश में संयुक्त अभियान चला रही हैं।जानकारी के अनुसार, आरोपी साबीर आलम पर 18 अक्टूबर 2001 को झारखंड के धनबाद स्थित वासेपुर में अपने साथियों के साथ मिलकर चर्चित शख्स फहीम खान की मां और मौसी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करने का आरोप था। मामले में अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के बाद उसके फरार होने पर अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित करते हुए संपत्ति कुर्क करने के भी आदेश जारी किए थे।बताया जा रहा है कि वर्ष 2013 से साबीर आलम अंबिकापुर के मोमिनपारा क्षेत्र में पहचान छिपाकर रह रहा था। इस दौरान वह बस संचालन और सिलाई की दुकान की आड़ में सामान्य जीवन व्यतीत करता रहा। स्थानीय स्तर पर उसने नई पहचान बना ली थी, जिससे उसकी असल पहचान लंबे समय तक छिपी रही।आश्रय देने के आरोप में बस संचालक पर भी मामला दर्जप्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी को अंबिकापुर में छिपकर रहने में मोमिनपारा निवासी और राजहंस बस के संचालक वैदुल खान की अहम भूमिका रही। आरोप है कि उसने आरोपी को आश्रय दिया और उसकी पहचान छिपाने में मदद की। पुलिस ने वैदुल खान और अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गिरफ्तारी से पहले ही पुलिस को चकमा देकर फरार
सूत्रों के मुताबिक, सूचना मिलने पर झारखंड पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अंबिकापुर पहुंची थी। हालांकि कार्रवाई के दौरान साबीर आलम पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इसके बाद झारखंड पुलिस ने सिटी कोतवाली अंबिकापुर पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी, जिसके बाद स्थानीय पुलिस भी जांच और तलाश अभियान में शामिल हो गई।
कई सवालों के घेरे में मामला
यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आजीवन कारावास की सजा प्राप्त और भगोड़ा घोषित आरोपी आखिर 13 वर्षों तक अंबिकापुर में पहचान बदलकर कैसे रहता रहा और इसकी भनक स्थानीय पुलिस या अन्य एजेंसियों को क्यों नहीं लगी।इसके अलावा यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि झारखंड पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस को साथ लिए बिना क्यों की। हालांकि इस संबंध में अब तक किसी भी पुलिस अधिकारी की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
फिलहाल, झारखंड पुलिस और सरगुजा पुलिस संयुक्त रूप से फरार आरोपी की तलाश में जुटी हुई हैं। साथ ही आरोपी को संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका की भी विस्तृत जांच की जा रही है।
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