बिलासपुर, 06 जुलाईं (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में पुलिस आरक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग पदोन्नति की विभागीय प्रक्रिया जारी रख सकता है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी आरक्षक का अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा।
यह अंतरिम आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने आरक्षकों की वरिष्ठता सूची में नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोपों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के बाद दिया।
याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार देशमुख ने राज्य शासन सहित अन्य पक्षकारों के खिलाफ याचिका दायर कर पुलिस मुख्यालय (क्क॥क्त) द्वारा स्वेच्छा से दूसरे जिलों में स्थानांतरण लेने वाले आरक्षकों की वरिष्ठता तय करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक बल, आरक्षक (भर्ती, पदोन्नति और सेवा की शर्तें) नियम, 2007 के अनुसार यदि कोई आरक्षक अपने अनुरोध पर दूसरे जिले में स्थानांतरित होता है तो उसे नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाना चाहिए। लेकिन पुलिस विभाग कथित रूप से इस नियम का पालन किए बिना ऐसे आरक्षकों की वरिष्ठता उनके नए जिले में पदस्थापना की तारीख के बजाय मूल नियुक्ति तिथि से जोड़कर पदोन्नति पर विचार कर रहा है।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और संबंधित नियमों का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन किसी भी कर्मचारी का अंतिम प्रमोशन आदेश अगली सुनवाई तक जारी नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने मामले में सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई में वरिष्ठता निर्धारण और पदोन्नति प्रक्रिया की वैधानिकता पर विस्तृत विचार किया जाएगा।
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