बिलासपुर, 07 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ में चल रही आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग खारिज करते हुए 129 संदिग्ध अभ्यर्थियों की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बिलासपुर भर्ती केंद्र में शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान लंबी कूद, गोला फेंक और दौड़ जैसी स्पर्धाओं में अनियमितताएं हुईं, जिससे चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई। उन्होंने पूरी भर्ती रद्द करने और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि यदि अनियमितता में शामिल अभ्यर्थियों की पहचान हो चुकी है और उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग किया जा सकता है, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करना उचित नहीं होगा। निर्दोष और पात्र अभ्यर्थियों को कुछ लोगों की कथित गड़बड़ी का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
अदालत ने सीबीआई जांच की मांग भी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से यह मामला व्यापक या संगठित भ्रष्टाचार का नहीं लगता। विभाग ने शिकायतों के आधार पर जांच कर संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान कर ली है, इसलिए फिलहाल सीबीआई जांच की आवश्यकता नहीं है।
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि पुलिस अधीक्षक द्वारा चिन्हित 129 संदिग्ध अभ्यर्थियों और संबंधित पत्राचार में उल्लेखित अन्य उम्मीदवारों की जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से कराई जाए। यदि जांच में कोई अभ्यर्थी दोषी पाया जाता है तो उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए और इसके बाद नियमानुसार उसकी नियुक्ति निरस्त करने सहित आवश्यक कार्रवाई की जाए।
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