सुकमा,08 जुलाई (आरएनएस)। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुकमा ने जिले के किसानों के लिए मौसम आधारित विशेष कृषि सलाह जारी करते हुए आगामी दिनों में संभावित हल्की से मध्यम बारिश को देखते हुए खरीफ फसलों की वैज्ञानिक तरीके से बुवाई करने की अपील की है। विशेषज्ञों ने उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीज, समय पर बुवाई और उचित बीजोपचार अपनाकर कम लागत में बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन लेने की सलाह दी है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की एमटीयू-1010 और छत्तीसगढ़ धान-1919, रागी की छत्तीसगढ़ रागी-2 तथा अरहर की राजीवलोचन जैसी अनुशंसित किस्मों का उपयोग करने की सलाह दी है। धान की बुवाई समतल खेतों में सीड ड्रिल के माध्यम से 20 सेंटीमीटर की कतार दूरी पर करने की अनुशंसा की गई है।यदि लगातार वर्षा के कारण खेतों में जलभराव हो जाए और कतार में बुवाई संभव न हो, तो किसानों को ‘लेही पद्धतिÓ अपनाने की सलाह दी गई है। इस पद्धति में हल्के जलभराव वाले खेतों में अंकुरित या उपचारित बीजों का समान रूप से छिड़काव किया जाता है, जिससे समय पर बुवाई संभव होती है और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। बुवाई से पहले बीजों को नमक घोल, बीजामृत या पीएसबी कल्चर से उपचारित करने तथा मौसम साफ होने पर ही कृषि रसायनों का छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है।कृषि विज्ञान केंद्र ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए किसानों से बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, मल्चिंग और वाफसा जैसी तकनीकों को अपनाने की अपील की है, जिससे खेती की लागत कम होगी और मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा।उद्यानिकी फसलों के लिए वर्षाकालीन सब्जियों जैसे भिंडी, बैंगन और मिर्च की खेती की तैयारी करने, करेला एवं बरबट्टी की खेती मेड़-नाली पद्धति से करने तथा अदरक और हल्दी की फसलों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी गई है। वहीं पपीता, केला, आम और अमरूद जैसे फलदार पौधों में समय-समय पर कटाई-छंटाई, सिंचाई और रोग प्रबंधन करने पर भी जोर दिया गया है।पशुपालन और मुर्गीपालन को लेकर भी कृषि वैज्ञानिकों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। किसानों से कहा गया है कि पशुओं का गलघोटू और लंगड़ा बुखार जैसी बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराएं तथा उन्हें स्वच्छ पानी, हरा चारा और मिनरल मिश्रण उपलब्ध कराएं। नवजात बछड़ों को जन्म के दो घंटे के भीतर खीस पिलाने की सलाह दी गई है। वहीं मुर्गीपालकों को रानीखेत रोग से बचाव के लिए निर्धारित समय पर वैक्सीन लगाने की सलाह दी गई है, ताकि खरीफ मौसम में पशुधन को संभावित बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।
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